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21 दिवसीय संसद के शीतकालीन सत्र पर मेरे विचार

Edited By ,Updated: 20 Dec, 2024 05:06 AM

my thoughts on the 21 day winter session of parliament

आप इसे संसद के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन पढ़ रहे हैं। पेश हैं 21 दिवसीय सत्र पर मेरे विचार।

आप इसे संसद के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन पढ़ रहे हैं। पेश हैं 21 दिवसीय सत्र पर मेरे विचार।

5 उचित संज्ञाओं का बोलबाला : इस सत्र में मूल्य वृद्धि, मुद्रास्फीति, संघवाद और बेरोजगारी जैसी सामान्य संज्ञाओं के बहस में हावी होने की उम्मीद थी। लेकिन इसके बजाय, केवल ये उचित संज्ञाएं ही सभी सही/गलत कारणों से जॉर्ज सोरोस, गौतम अडानी और जवाहरलाल नेहरू सुर्खियों में रहीं। सत्र के अंतिम दिनों में, डा. बी.आर. अंबेडकर और गृह मंत्री अमित शाह ही ट्रैंड कर रहे थे। यह स्तंभकार उसी पंक्ति में कुछ ही सीटों की दूरी पर बैठा था, जहां गृह मंत्री अपना भाषण दे रहे थे। यहां उन्होंने क्या कहा, (अनुवाद) ‘यह फैशन बन गया है, अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर... अगर आपने इतनी बार भगवान का नाम लिया होता, तो आप 7 जन्मों के लिए स्वर्ग चले जाते’। इस स्तंभकार के दाईं ओर बैठे विपक्ष के नेता ने तुरंत जवाब दिया। उनके हस्तक्षेप को माइक्रोफोन पर नहीं पकड़ा गया, न ही कैमरा मल्लिकार्जुन खरगे पर था जिन्होंने कहा, ‘‘गृह मंत्री, आपने जो अभी कहा उससे ऐसा लगता है कि आपको अंबेडकर से बहुत परेशानी है। क्यों?’’

किसने सबसे ज्यादा बात की : 18 दिसंबर तक, राज्यसभा कुल 43 घंटे चली। इसमें से 10 घंटे विधेयकों पर चर्चा हुई। संविधान पर बहस साढ़े 17 घंटे चली। शेष साढ़े 15 घंटों में से साढ़े चार घंटे या लगभग 30 प्रतिशत समय किसने बोला? यह राज्यसभा के सभापति और उप-राष्ट्रपति थे। क्या जगदीप धनखड़ ने संसद में कोई नया रिकॉर्ड बनाया?

शानदार शुरूआत : इस सप्ताह की शुरूआत में 6 सांसदों ने शपथ ली। सना सतीश बाबू (तेदेपा), मस्तन राव यादव बीधा (तेदेपा), रयागा कृष्णैया (भाजपा), रेखा शर्मा (भाजपा), सुजीत कुमार (भाजपा) और रीताब्रत बनर्जी (ए.आई.टी.सी.)। रीताब्रत को शपथ लेने के अगले दिन संविधान पर बोलने का मौका भी मिला। जबकि उनके पार्टी के सहयोगियों ने प्रस्तावना के प्रत्येक शब्द को अपने भाषण के विषय के रूप में लिया। उन्होंने रबींद्रनाथ टैगोर पर बात की और उनकी कविताओं ‘द मॉर्निंग सॉन्ग ऑफ इंडिया’ से 4 छंद पढ़े। उस कविता के पहले छंद को संविधान सभा ने हमारे राष्ट्रगान के रूप में अपनाया। बंगाली और अंग्रेजी की रीताब्रत की जुगलबंदी ने हमारे रौंगटे खड़े कर दिए।

मैराथन भाषण : ‘भारतीय संविधान के 75 वर्षों की गौरवशाली यात्रा’ शीर्षक वाली बहस के दौरान, किसी ने बुदबुदाया। सत्ता पक्ष की ओर से कुछ भाषणों को सुनकर, मैं सोच रहा था कि हम संविधान के 75 वर्षों पर चर्चा कर रहे हैं या आपातकाल के 49 वर्षों पर! कुछ सदस्यों ने एक घंटे से अधिक समय तक बात की। मोदी, शाह, सिंह, रिजिजू, नड्डा और निर्मला सीतारमण। मल्लिकार्जुन खरगे एकमात्र विपक्षी सांसद थे जिन्होंने एक घंटे से अधिक समय तक बात की।

भाजपा सांसद द्वारा मेरा पसंदीदा भाषण : सरकार के पिछले कार्यकाल में, भूपेंद्र यादव पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ श्रम और रोजगार मंत्री हुआ करते थे। जून 2024 से, श्रम और रोजगार विभाग किसी और को दे दिया गया है। उन्हें सुनकर बहुत अच्छा लगा क्योंकि उन्होंने शिकागो विश्वविद्यालय के एक शोध पत्र का उल्लेख किया जिसमें दुनिया भर के संविधानों के जीवन काल का विश्लेषण किया गया था। पेपर से उद्धरण देते हुए, मंत्री ने सांझा किया कि 80 वर्ष की आयु तक 50 प्रतिशत संविधानों की मृत्यु हो जाने की संभावना है और केवल 19 प्रतिशत 50 वर्ष की आयु तक जीवित रहते हैं। 7 प्रतिशत तो अपना दूसरा जन्मदिन भी नहीं जी पाते। दिलचस्प है।

सबसे अच्छी जन्मदिन पार्टी : संसद के सत्र के दौरान सांसदों द्वारा कई पार्टियों का आयोजन किया जाता है। 12 दिसंबर को शरद (चाचा) पवार का 84वां जन्मदिन था। उनकी बेटी, लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने एक आरामदायक जन्मदिन रात्रिभोज का आयोजन किया। यह उत्सव न केवल उनके पिता के लिए था, बल्कि उनकी मां श्रीमती प्रतिभा पवार के लिए भी था, जिनका अगले दिन जन्मदिन था। उपस्थित मेहमानों में तेलंगाना के सी.एम. रेवंत रैड्डी, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपनी पत्नी डिंपल यादव सांसद, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और सांसद जया बच्चन, सौगात रॉय और अभिषेक मनु सिंघवी शामिल थे। काश और भी 80 वर्षीय लोगों में ऐसी सकारात्मक सोच होती।

संविधान पर मेरे भाषण का एक अंश : संविधान किसी लाइब्रेरी में रखी किताब से कहीं ज़्यादा है। यह भारत की सड़कों पर मौजूद एक जीवंत दस्तावेज है। क्रिसमस को थोड़ा समय रहता  है। कोलकाता में एक यहूदी बेकरी है जो स्वादिष्ट क्रिसमस केक बनाती है। उस यहूदी बेकरी में काम करने वाले सभी 300 कर्मचारी एक ही समुदाय से हैं। वे सभी मुसलमान हैं। और क्रिसमस से लगभग एक हफ्ते पहले, आप बेकरी के बाहर लंबी कतारें देखते हैं। अगर आप जाकर उन कतारों में खड़े लोगों से पूछें, तो वे आपको अपना नाम बताएंगे, ‘भास्कर, रीमा, अरुण’। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। वे सभी भारतीय हैं। ईसाई त्यौहार के लिए केक, जिसे मुस्लिम बेकर बनाते हैं और हिंदू खरीदार उत्साह से खरीदते हैं। आइए, अगले हफ्ते कोलकाता क्रिसमस फैस्टीवल में बंगाल में क्रिसमस मनाएं। मार्च के अंत में फिर से रैड रोड पर लाइन में लगें और ईद की नमाज देखें। और, तारीख याद रखें, 30 अप्रैल 2025। खूबसूरत नए जगन्नाथ मंदिर को देखने के लिए दीघा आएं।(शोध श्रेय: आयुष्मान डे, वर्णिका मिश्रा)-डेरेक ओ’ब्रायन(संसद सदस्य और टी.एम.सी. संसदीय दल (राज्यसभा) के नेता)
 

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