अकाली दल की पहेली सुलझने की बजाय और उलझेगी

Edited By ,Updated: 15 Dec, 2024 06:06 AM

the akali dal puzzle will get more complicated instead of getting solved

श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से इस महीने की 2 तारीख को अकाली नेताओं को लगाई गई ‘तनख्वाह’ के बाद पंजाबियों विशेषकर सिख समूह को लग रहा था कि अब अकाली दल का संकट शीघ्र ही हल हो जाएगा और श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश को मानते हुए अकाली दल के दोनों पक्ष...

श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से इस महीने की 2 तारीख को अकाली नेताओं को लगाई गई ‘तनख्वाह’ के बाद पंजाबियों विशेषकर सिख समूह को लग रहा था कि अब अकाली दल का संकट शीघ्र ही हल हो जाएगा और श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश को मानते हुए अकाली दल के दोनों पक्ष एकजुट हो जाएंगे। इस कारण आम सिखों की एक बड़ी गिनती खुशी मना रही थी कि अकाली नेताओं की ओर से श्री अकाल तख्त साहिब की श्रेष्ठता मंजूर करने के साथ सिख समुदाय की महान संस्था का कद और भी ऊंचा हुआ है। मगर इस खुशी पर फैसले से एक दिन बाद ही प्रश्नचिन्ह लग गया जब नारायण सिंह चौड़ा नाम के एक व्यक्ति ने सुखबीर सिंह बादल पर पिस्तौल से हमला करने की कोशिश की और अकाली दल बादल के नेताओं ने सिंह साहिबान के निर्णय के अनुसार 3 दिनों में अकाली नेताओं के इस्तीफे मंजूर करने की कार्रवाई से भी मुख मोड़ लिया। 

अकाली दल का संकट तो वास्तव में साल 2015 में शुरू हो गया था जब सिख संगतों की भावनाओं के विपरीत जाकर अकाली दल के नेताओं के दबाव के अधीन श्री अकाल तख्त साहिब के तत्कालीन जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह के नेतृत्व में डेरा सिरसा के प्रमुख को माफी दे दी गई थी। इस माफी का विरोध कर रहे सिख समाज की ओर से दिए जा रहे धरने पर बैठी सिख संगत पर पंजाब पुलिस ने फायरिंग कर दी जिससे 2 नवयुवकों की मृत्यु हो गई। इसके अतिरिक्त उस समय की अकाली दल सरकार के कई निर्णय जिनमें डेरा प्रमुख की फिल्म को सुरक्षा के घेरे में चलाना, कोटकपूरा गोलीकांड और एस.जी.पी.सी. की ओर से डेरा प्रमुख की माफी को उचित ठहराने के लिए करीब 92 लाख रुपए के विज्ञापन देना भी शामिल है।

सिख समुदाय में अकाली दल बादल के प्रति भारी विरोध शुरू हो गया था जिस कारण पिछले 10 वर्षों से अकाली दल को इसका विरोध झेलने के कारण चुनावों में करारी हार का मुंह देखना पड़ा परन्तु लोकसभा के निराशाजनक परिणामों के बाद अकाली दल के नेता पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को पंथ विरोधी लिए गए निर्णयों के लिए जिम्मेदार ठहराने लग पड़े। उन्होंने सुखबीर के इस्तीफे की मांग करने के साथ-साथ अकाली दल के विरोध में  ‘अकाली सुधार लहर’ का गठन कर लिया। जब सुखबीर सिंह बादल और उनके साथियों ने सुधार लहर के नेताओं को कोई प्राथमिकता न दी तो सुधार लहर के नेताओं ने अकाली दल (ब) की ओर से सिख पंथ के हितों के विरुद्ध लिए गए निर्णयों का विरोध न करने के स्थान पर जिम्मेदारी लेते हुए श्री अकाल तख्त साहिब पर शिकायत की कि इन सारी गलतियों के लिए सुखबीर सिंह बादल और उनके साथी जिम्मेदार हैं। इसलिए श्री अकाल तख्त साहिब सुखबीर सिंह बादल, उनके सहयोगी अकाली नेता और शिकायतकत्र्ताओं के विरुद्ध पंथक रहित मर्यादा के अनुसार ‘तनख्वाह’ लगाए। 

इस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए 5 सिंह साहिबानों ने 2 दिसम्बर को सुखबीर सिंह बादल और उनके  सहयोगी, सुधार लहर के नेता और तत्कालीन अंतरिम कमेटी एस.जी.पी.सी. को ‘तनख्वाह’ लगाकर बर्तन मांजने, जूते साफ करने, गुरबाणी सुनने के अतिरिक्त अकाली दल के दोनों पक्षों को इकट्ठे होने, बादल अकाली दल के नेताओं की ओर से दिए गए इस्तीफे 3 दिनों में मंजूर करने और 7 सदस्यीय कमेटी द्वारा नई भर्ती करवाने के बारे में ‘हुकमनामा’ जारी किया था। श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से अकाली दल (ब) को  3 दिनों में इस्तीफे मंजूर कर रिपोर्ट अकाल तख्त साहिब पर पेश करने और अकाली दल की नई भर्ती शुरू करने के लिए घोषित सात सदस्यीय कमेटी के मामले पर कोई कार्रवाई नहीं की जबकि सुधार लहर के नेताओं ने श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश के अनुसार अपना ढांचा भंग कर दिया है।

सुधार लहर की ओर से ढांचा बंद कर देने की कार्रवाई के साथ सिख समुदाय का विश्वास सुधार लहर के नेताओं में बढ़ गया है जबकि सुखबीर सिंह बादल और उनके साथियों ने बेशक अपने किए गए गुनाह मान लिए हैं मगर श्री अकाल तख्त साहिब से जारी हुए राजनीतिक आदेशों पर कोई भी कार्रवाई न करने तथा यह दावा करने की अकाल तख्त की ओर से इस्तीफे मंजूर करने के लिए 20 दिन की मोहलत मिल गई है, के कारण सिख समुदाय में यह प्रभाव जाने लगा है कि अकाली दल (ब) के नेता अकाल तख्त पर पहले जैसा ही दबदबा बना रहे हैं और यह सारी कार्रवाई केवल राजनीतिक फायदा लेने के लिए की जा रही है। सुखबीर पर हमला करने वाले नारायण सिंह चौड़ा के बेटे ने आरोप लगाया है कि शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष हरजिंद्र सिंह धामी ने हमले से पहले चौड़ा के साथ मुलाकात की और उसने इस मुलाकात का वीडियो  सार्वजनिक करने की मांग की है। चौड़ा के बेटे के बयान ने सिख समुदाय में शंका पैदा कर दी है।-इकबाल सिंह चन्नी(भाजपा प्रवक्ता पंजाब)

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