HDFC Bank ने ग्राहकों को दिया तोहफा, कर दिया बड़ा ऐलान

Edited By jyoti choudhary,Updated: 07 Jan, 2025 01:54 PM

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देश के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर बैंक HDFC ने नए साल पर अपने ग्राहकों को तोहफा दिया है। बैंक ने कुछ विशेष अवधि के लोन पर मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में 0.05% की कटौती की है। यह कटौती ओवरनाइट, छह महीने, एक साल और

बिजनेस डेस्कः देश के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर बैंक HDFC ने नए साल पर अपने ग्राहकों को तोहफा दिया है। बैंक ने कुछ विशेष अवधि के लोन पर मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में 0.05% की कटौती की है। यह कटौती ओवरनाइट, छह महीने, एक साल और तीन साल की अवधि के लोन पर लागू होगी। हालांकि, अन्य अवधियों के लिए MCLR दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। HDFC बैंक की नई MCLR दरें 7 जनवरी 2025 से प्रभावी हो गई हैं। MCLR दर में बदलाव से आपके लोन की ईएमआई पर क्या असर पड़ सकता है, यह जानना आपके लिए जरूरी है।

HDFC बैंक की नई MCLR दरें - 7 जनवरी 2025 से लागू

  • एचडीएफसी बैंक के ओवरनाइट एमसीएलआर 9.15 फीसदी कर दी है। ये पहले 9.20 फीसदी थी, जिसमें 0.05 फीसदी रेट घटाया गया है।
  • एक महीने का एमसीएलआर 9.20 फीसदी है। इसमें बदलाव नहीं किया गया है।
  • तीन महीने की एमसीएलआर 9.30 प्रतिशत है। इसमें बदलाव नहीं किया गया।
  • छह महीने की एमसीएलआर 9.45 फीसदी थी, जिसे घटाकर 9.40 फीसदी कर दिया गया है। बैंक ने इसमें रेट 0.05 फीसदी घटाया है।
  • एक साल का एमसीएलआर 9.45 फीसदी था जिसे घटाकर 9.40 फीसदी कर दिया गया है। इसमें बैंक ने 0.05 फीसदी रेट घटा दिया है।
  • 2 साल से अधिक पीरियड के लिए एमसीएलआर 9.45 फीसदी है। इसमें बदलाव नहीं किया गया।
  • 3 साल से अधिक पीरियड के लिए एमसीएलआर 9.50 फीसदी था, जिसे घटाकर 9.45 फीसदी कर दिया गया है। इसमें 0.05 फीसदी का बदलाव कर दिया गया है।

MCLR बढ़ने या घटने से लोन की EMI पर क्या असर पड़ता है?

MCLR (मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट) बैंक द्वारा लोन की ब्याज दर तय करने का एक तरीका है। जब बैंक अपने MCLR रेट में बदलाव करता है, तो यह आपके होम लोन, पर्सनल लोन, और ऑटो लोन जैसी फ्लोटिंग रेट लोन की ईएमआई को प्रभावित करता है।

  • MCLR बढ़ने पर: लोन की ब्याज दर बढ़ जाती है, जिसके कारण आपकी EMI भी बढ़ सकती है।
  • MCLR घटने पर: लोन की ब्याज दर घट जाती है, जिससे आपकी EMI में कमी हो सकती है।

उदाहरण के लिए, अगर आप कार या घर खरीदने का विचार कर रहे हैं, तो MCLR में कमी होने पर आपको पहले से सस्ते ब्याज दर पर लोन मिल सकता है। वहीं, जिनके पास पहले से लोन है, उनकी मासिक EMI में भी थोड़ी कमी हो सकती है।

MCLR कैसे तय होता है?

MCLR को निर्धारित करने में कई कारक शामिल होते हैं, जैसे डिपॉजिट रेट, रेपो रेट, ऑपरेशनल कॉस्ट, और कैश रिजर्व रेशो को बनाए रखने की लागत। रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में बदलाव का सीधा असर MCLR पर पड़ता है, जिससे लोन की ब्याज दरें प्रभावित होती हैं। जब MCLR बढ़ता है, तो लोन की ब्याज दर बढ़ती है और जब घटता है, तो ब्याज दर घट जाती है।
 

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