Edited By jyoti choudhary,Updated: 29 Mar, 2025 03:06 PM

भारत सरकार ने प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) के तहत 15,000 जन औषधि केंद्र (JAKs) खोलने का लक्ष्य तय समय से दो महीने पहले ही पूरा कर लिया है। 28 मार्च को संसद को दी गई जानकारी के अनुसार, 28 फरवरी 2025 तक पूरे देश में 15,057 जन औषधि...
नई दिल्लीः भारत सरकार ने प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) के तहत 15,000 जन औषधि केंद्र (JAKs) खोलने का लक्ष्य तय समय से दो महीने पहले ही पूरा कर लिया है। 28 मार्च को संसद को दी गई जानकारी के अनुसार, 28 फरवरी 2025 तक पूरे देश में 15,057 जन औषधि केंद्र कार्यरत हैं।
2026 तक 20,000 और 2027 तक 25,000 केंद्र खोलने का लक्ष्य
केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने लोकसभा में बताया कि सरकार ने अब मार्च 2026 तक 20,000 और मार्च 2027 तक 25,000 जन औषधि केंद्र खोलने का लक्ष्य रखा है।
जन औषधि केंद्रों की प्रमुख उपलब्धियां
- 2,047 प्रकार की दवाएं और 300 सर्जिकल उत्पाद उपलब्ध
- कार्डियोवैस्कुलर, डायबिटीज, एंटी-इन्फेक्टिव, ऑन्कोलॉजी और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल जैसी महत्वपूर्ण चिकित्सा आवश्यकताओं को कवर करती हैं
- ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50% से 80% तक सस्ती कीमतें
- MRP पर बिक्री होती है, कोई अतिरिक्त छूट नहीं
सरकार का लक्ष्य मार्च 2025 तक दवाओं की संख्या 2,100 और सर्जिकल व मेडिकल उपकरणों की संख्या 310 तक बढ़ाने का है।
बिक्री और बचत के आंकड़े
- 2024-25 वित्त वर्ष में अब तक ₹1,767.18 करोड़ की दवाएं बेची गईं
- पिछले वित्त वर्ष (2023-24) की तुलना में 33% की वृद्धि (₹1,327 करोड़ की बिक्री हुई थी)
- पिछले 10 वर्षों में JAKs के माध्यम से ₹6,975 करोड़ मूल्य की दवाएं बेची गईं, जिससे नागरिकों को ₹30,000 करोड़ की अनुमानित बचत हुई
- रोजाना 10-12 लाख लोग इन केंद्रों से सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं खरीदते हैं
जन औषधि केंद्रों का विस्तार और संचालन
- गुरुग्राम में एक केंद्रीय गोदाम और बेंगलुरु, चेन्नई, सूरत और गुवाहाटी में चार क्षेत्रीय केंद्र
- 36 वितरकों का नेटवर्क और प्रोत्साहन-आधारित स्टॉकिंग प्रणाली
- JAKs खोलने के लिए फ्रेंचाइजी मॉडल अपनाया गया
- व्यक्तिगत उद्यमी, NGOs, सोसायटी, ट्रस्ट, फर्म और निजी कंपनियां ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं
- आमतौर पर दो JAKs के बीच न्यूनतम 1 किमी की दूरी रखी जाती है