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NBFC सेक्टर संकट में: NPA रिकॉर्ड स्तर पर, 50,000 करोड़ रुपए का नुकसान

Edited By jyoti choudhary,Updated: 27 Feb, 2025 04:34 PM

nbfc sector in crisis npa at record level

समाज का एक बड़ा वर्ग कर्ज और लोन के जाल में फंसता जा रहा है। जब बैंकों से लोन पास नहीं होता, तो लोग एनबीएफसी (NBFC) की ओर रुख करते हैं। माइक्रो फाइनेंस कंपनियां कर्ज हासिल करने का एक महत्वपूर्ण जरिया बन गई हैं।

बिजनेस डेस्कः समाज का एक बड़ा वर्ग कर्ज और लोन के जाल में फंसता जा रहा है। जब बैंकों से लोन पास नहीं होता, तो लोग एनबीएफसी (NBFC) की ओर रुख करते हैं। माइक्रो फाइनेंस कंपनियां कर्ज हासिल करने का एक महत्वपूर्ण जरिया बन गई हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, डिजिटल लोन और आसान क्रेडिट सुविधा के चलते पिछले कुछ वर्षों में लाखों लोगों ने बिना ज्यादा सोचे-समझे लोन लिया लेकिन अब जब लोन चुकाने की बारी आई, तो बड़ी संख्या में लोग डिफॉल्टर हो रहे हैं। इसका सीधा असर एनबीएफसी सेक्टर पर पड़ा है, जिससे इसका नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। दिसंबर 2024 तक के आंकड़ों के अनुसार, एनबीएफसी कंपनियों को करीब 50,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

50000 करोड़ बढ़ा NPA

माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में दिसंबर तक NPA बढ़कर 50,000 करोड़ रुपए हो गया है। ये इसका रिकॉर्ड हाई लेवल है और अब तक जारी किए लोन का 13% है। NPA यानी जो लोग लोन लेकर भर नहीं पा रहे हैं। इसके अलावा कई ऐसे लोन भी हैं जो अब NPA बनने की कगार पर हैं। उनका आंकड़ा भी बढ़कर 3.2% हो गया है। एक साल पहले यह सिर्फ 1% और अब ये ढ़ाई गुना बढ़ गया है। इससे साफ पता चलता है कि लोगों के लोन लेकर भरने की क्षमता कमजोर हो रही है।

NPA का ये अनुमान क्रेडिट ब्यूरो Crif हाई मार्क के आंकड़ों पर आधारित है। ये ब्यूरो पूरा NPA आंकड़ा नहीं बताता है लेकिन अलग-अलग तरह के लोन के लिए रिस्क का आंकलन करता है और अनुमान बताता है। Crif के मुताबिक, 31 दिसंबर तक 91 से 180 दिनों तक बकाया लोन 3.3% थे। 180 दिनों से ज्यादा बकाया लोन 9.7% थे। मतलब, लोगों ने 90 दिनों के बाद भी लोन नहीं चुकाया है।

लोन डिफॉल्ट क्यों बढ़ रहा है?

आसान लोन अप्रूवल: कई फिनटेक कंपनियां और NBFCs बिना ज्यादा दस्तावेजों के तुरंत लोन दे रही थीं।
रोजगार में गिरावट: महामारी के बाद अब भी कई लोगों को स्थिर आय नहीं मिल रही, जिससे लोन चुकाना मुश्किल हो गया।
बढ़ती महंगाई: रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च बढ़ गया है, जिससे लोग EMI समय पर नहीं भर पा रहे।
मिसयूज़ ऑफ डिजिटल लोन: कई लोग बिना जरूरत के लोन ले रहे थे और उसका सही उपयोग नहीं कर पा रहे।

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