Edited By jyoti choudhary,Updated: 28 Feb, 2025 01:41 PM
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कमजोर होता रुपया प्रवासी भारतीयों (NRI) के लिए फायदेमंद हो सकता है लेकिन विदेश में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों और अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वालों के लिए यह बड़ी चुनौती बन गया है। रुपए की गिरावट से न केवल उनकी शिक्षा महंगी हुई है,
बिजनेस डेस्कः कमजोर होता रुपया प्रवासी भारतीयों (NRI) के लिए फायदेमंद हो सकता है लेकिन विदेश में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों और अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वालों के लिए यह बड़ी चुनौती बन गया है। रुपए की गिरावट से न केवल उनकी शिक्षा महंगी हुई है, बल्कि रहने-खाने और लोन चुकाने की लागत भी बढ़ गई है।
विदेश में पढ़ाई हुई महंगी
छह महीनों में डॉलर के मुकाबले रुपया लगभग 5% कमजोर होकर अगस्त के 83.5 से गिरकर 87.2 पर आ गया है। मतलब, अगर विदेश में किसी की पढ़ाई और रहने-खाने का खर्चा एक करोड़ रुपए है, तो उसमें 5 लाख रुपए का इजाफा हो गया है।
ऐसे दौर में ब्रिटेन ने प्रस्ताव रखा है कि अंतरराष्ट्रीय ग्रेजुएट्स को दो साल से ज्यादा रहने के लिए 36,000 से 40,000 पाउंड सालाना वेतन वाली ग्रेजुएट लेवल की नौकरी करनी होगी। कनाडा भी भारतीय छात्रों के लिए इमिग्रेशन के नियम सख्त कर रहा है। सरकार ने वहां के अधिकारियों को परमिट रद्द करने और 'स्टूडेंट डायरेक्ट स्ट्रीम वीजा प्रोग्राम' खत्म करने का अधिकार दिया है।
एजुकेशन लोन पर असर
एजुकेशन लोन कंपनी HDFC Credila के को-फाउंडर अजय बोहोरा बताते हैं कि पहले, छात्र पढ़ाई के बाद वर्क वीजा का इस्तेमाल डॉलर में कमाई और अपने लोन का बड़ा हिस्सा चुकाने के लिए करते थे। अमेरिका में अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम्स में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों पर इसका बहुत बुरा असर पड़ सकता है क्योंकि उनकी पढ़ाई का कुल खर्चा 1.5 करोड़ रुपए से भी अधिक होता है। बोहोरा के मुताबिक, इसका मतलब है कि या तो लोन चुकाने की अवधि लंबी होगी या फिर EMI ज्यादा। रुपए के कमजोर होने की वजह से वापस आने वाले छात्रों का हवाई किराया भी बढ़ गया है।
एजुकेशन काउंसलर और इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड फॉरेन स्टडीज के संस्थापक के. पी. सिंह कहते हैं कि हालांकि करंसी में उतार-चढ़ाव आम बात है, लेकिन इस साल डॉलर में बहुत तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसका विदेशी शिक्षा पर बहुत बड़ा असर पड़ा है। करियर काउंसलर करण गुप्ता के अनुसार, छात्रों को विदेशी करंसी में लोन लेने से बचना चाहिए, क्योंकि भारत वापस आने पर उसे चुकाना ज्यादा महंगा होगा।
टूर पैकेजों की कीमत में इजाफा
रुपए में गिरावट और होटलों के किराये में बढ़ोतरी से इस गर्मी में छुट्टियां मनाने विदेश जाना महंगा पड़ सकता है। अप्रैल-जून की अवधि में सालाना 15-20% की बढ़ोतरी हुई है। टूर ऑपरेटर ये बढ़ोतरी यात्रियों पर डाल रहे हैं। यूरोपीय देशों की यात्रा पर इसका ज्यादा असर पड़ेगा। उसके बाद दक्षिण पूर्व एशियाई देश आएंगे। इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स (IATO) के अध्यक्ष राजीव मेहरा का कहना है कि 15-20% की मौजूदा बढ़ोतरी 2017-18 और 2018-19 के बाद सबसे ज्यादा है। उन दोनों सालों में भी रुपए के कमजोर होने के कारण अंतरराष्ट्रीय टूर पैकेजों की कीमत में इसी तरह की बढ़ोतरी हुई थी। वे कहते हैं कि टूर पैकेजों की कीमत बढ़ गई है क्योंकि डॉलर महंगा है।