Edited By jyoti choudhary,Updated: 26 Feb, 2025 05:54 PM
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भारतीय शेयर बाजार में पिछले एक महीने से भारी गिरावट देखी जा रही है। बाजार में उतार-चढ़ाव के पीछे मुख्य रूप से डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली को कारण माना जा रहा है। विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी से बाजार दबाव...
बिजनेस डेस्कः भारतीय शेयर बाजार में पिछले एक महीने से भारी गिरावट देखी जा रही है। बाजार में उतार-चढ़ाव के पीछे मुख्य रूप से डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली को कारण माना जा रहा है। विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी से बाजार दबाव में आ गया है। हालांकि, मंगलवार को शेयर बाजार में हल्की रिकवरी देखने को मिली।
बाजार की गिरावट से निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है, जिससे दलाल स्ट्रीट पर चिंता बढ़ गई है। इसी बीच, 61 लाख निवेशकों ने अपने SIP (सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) को अस्थायी रूप से रोक दिया है, जिससे निवेशकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा गिरावट को देखते हुए निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है। बाजार में उतार-चढ़ाव एक सामान्य प्रक्रिया है और लंबी अवधि के निवेशकों को धैर्य बनाए रखना चाहिए। SIP को रोकने या बंद करने से पहले विशेषज्ञों की सलाह लेना महत्वपूर्ण है, क्योंकि बाजार में सुधार होने पर यह नुकसानदेह हो सकता है।
अक्सर ऐसा कहा जाता है कि शेयर मार्केट में निवेश के मुकाबले म्यूचुअल फंड में निवेश करना सेफ होता है, जो कि काफी हद तक सही भी है लेकिन इन मार्केट ने ऐसी चाल चली है कि म्यूचुअल फंड से भी लोगों का भरोसा उठता जा रहा है। खासतौर पर स्मॉल कैप फंड और मिड कैप फंड में निवेश करने वाले निवेशकों ने मार्केट मोड़ लिया है। मुंह मोड़ लिया ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि जनवरी 2025 में SIP स्टॉपेज रेशियो में बढ़ोतरी देखने को मिली है। एसआईपी बंद करने वाले लोगों की संख्या में 82.73% की बढ़ोतरी हुई है जो कि बीते सालों की तुलना में सबसे अधिक है। एसआईपी के जरिए निवेश करने वालों की तुलना में एसआईपी बंद करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। जनवरी में SIP बंद करने वालों की संख्या 61.33 लाख दर्ज की गई है जो कि दिसंबर में 44.90 लाख की तुलना में ज्यादा है।