April Fool Day: आज मनाया जाएगा अप्रैल फूल डे जानें कैसे हुई मूर्ख दिवस की शुरुआत

Edited By Niyati Bhandari,Updated: 01 Apr, 2025 06:51 AM

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April Fool Day: 1 अप्रैल के दिन को दुनिया भर में ‘अप्रैल फूल डे’ के नाम से जाना जाता है। इसको ‘मूर्ख दिवस’ के नाम से भी ख्याति प्राप्त है। इस दिन कोई किसी को मूर्ख बनाता है तो कोई किसी से खुद मूर्ख बन जाता है। इस दिन को हंसी-मजाक के रूप में सेहतमंद...

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April Fool Day: 1 अप्रैल के दिन को दुनिया भर में ‘अप्रैल फूल डे’ के नाम से जाना जाता है। इसको ‘मूर्ख दिवस’ के नाम से भी ख्याति प्राप्त है। इस दिन कोई किसी को मूर्ख बनाता है तो कोई किसी से खुद मूर्ख बन जाता है। इस दिन को हंसी-मजाक के रूप में सेहतमंद दिन के तौर पर भी मनाया जाता है। अप्रैल फूल पर किए जाने वाले मजाक से लोग होली के रंगों की तरह खुश होते हैं, बुरा नहीं मानते मगर ध्यान रहे कि कोई भी मजाक एक सीमा तक ही होना चाहिए।

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शुरूआत से जुड़ी कहानियां
अप्रैल फूल डे का प्रचलन बहुत पुराना है और इसकी शुरूआत कहां से हुई, इस संबंधी अलग-अलग विचार सुनने को मिलते हैं। एक विचार है कि इसकी शुरूआत फ्रांस, यूनान, इटली जैसे यूरोपीय देशों से हुई। इस संबंधी कई कहानियां प्रचलित हैं। जैसे कि यूरोप में पुराने जमाने में पहली अप्रैल को मनाने का रिवाज इस तरह से था कि इस दिन हर घर में नौकर मालिक बनता था तथा मालिक नौकर। नौकर इस दिन अपने मालिक के सुंदर वस्त्र पहनता, मालिक की कुर्सी पर बैठता तथा हुक्म चलाता था। इस दिन मालिक बने नौकर को यह अधिकार था कि वह नौकर बने मालिक को सजा भी दे सकता था। अपने आपको बहुत बड़े कहलवाने वाले कई यूरपियनों ने इस परम्परा को बंद करवाने की कई बार कोशिश की मगर यह परम्परा लम्बे समय तक ज्यों की त्यों जारी रही। इसे जारी रखने वालों का विचार था कि वर्ष में एक बार मूर्ख बना कर हमने अपनी बुद्धि का प्रदर्शन करना होता है।

फ्रांस में इस दिन के बारे कहा जाता है कि पुराने समय में पहली अप्रैल को एक सभा होती थी। उसमें राजा, राजगुरु तथा आम लोग शामिल होते थे। इस सभा का एक प्रधान चुना जाता था, जिसे मूर्खों का गुरु कहा जाता था। वहीं पर एक गधा सम्मेलन होता था जिसमें सभी गधे की आवाज निकालते और इस तरह एक-दूसरे को मूर्ख समझते हुए मजाक किया जाता था। 

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यूनान के बारे में कहा जाता है कि वहां एक शेखी बघारने वाला आदमी था, जिसे मूर्ख बनाने के लिए लोगों ने कहा कि आज रात पहाड़ी पर देवता प्रकट होगा, जो मुंह मांगा वरदान देगा। यह सुनकर शेखी बघारने वाला कुछ और लोगों को साथ लेकर पहाड़ी पर जा पहुंचा, मगर जब देवता प्रकट नहीं हुए तो वह अपने दोस्तों सहित वापस चल दिया। जब वे सब वापस आ रहे थे तो जिन लोगों ने उसके साथ यह मजाक किया था, उन्होंने उसका खूब मजाक उड़ाया। माना जाता है कि उस दिन 1 अप्रैल थी और तब से ही इस दिन मजाक करने का प्रचलन हुआ। इटली में इस दिन स्त्री-पुरुष एक साथ नाचते-गाते तथा हंगामे करते हैं, जबकि स्कॉटलैंड में पहली अप्रैल को मूर्खों का दिवस कहा जाता है। वहां मुर्गे जैसी अवाज निकाली जाती है क्योंकि वहां मुर्गे को मूर्खता का प्रतीक माना जाता है। इसी तरह के कई और प्रसंग सुनने को मिलते हैं।

जहां तक भारत का संबंध है, इसके बारे में यही कहा जा सकता है कि यह दिवस पश्चिमी सभ्यता की देन है। इससे बढ़ कर यह अंग्रेजीयत की देन है क्योंकि जैसे हमने अंग्रेजों से अंग्रेजी भाषा, संस्कृति तथा पहरावा सीखा है, इसी तरह अप्रैल फूल दिवस मनाने का चलन भी हमें उन्हीं से मिला है। यही कारण है कि यह बात किसी को पता नहीं कि इस दिन की परम्परा कहां से चली मगर यह बात प्रचलित है कि हम पीढ़ी दर पीढ़ी एक-दूसरे को बेवकूफ बना कर इस हंसी-मजाक वाले दिन का आनंद लेते हैं।

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