Bhaum Pradosh: फाल्गुन माह के पहले प्रदोष पर बनेगा त्रिपुष्कर योग, मिलेगा 3 गुना फल

Edited By Niyati Bhandari,Updated: 23 Feb, 2025 02:19 PM

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Bhaum Pradosh Vrat 2025 Date: फाल्गुन माह का पहला प्रदोष व्रत 25 फरवरी मंगलवार को रखा जाएगा इसलिए यह भौम प्रदोष व्रत कहलाएगा। भौम प्रदोष पर त्रिपुष्कर योग का निर्माण होगा, जिससे इस दिन किसी भी शुभ काम का तीन गुना फल प्राप्त होगा।

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Bhaum Pradosh Vrat 2025 Date: फाल्गुन माह का पहला प्रदोष व्रत 25 फरवरी मंगलवार को रखा जाएगा इसलिए यह भौम प्रदोष व्रत कहलाएगा। भौम प्रदोष पर त्रिपुष्कर योग का निर्माण होगा, जिससे इस दिन किसी भी शुभ काम का तीन गुना फल प्राप्त होगा। त्रिपुष्कर योग सुबह 6:50 पर बनेगा, जो दोपहर 12:47 तक रहेगा। इसके अलावा व्यतिपात योग और वरीयान योग भी बनेंगे।व्यतीपात योग सुबह 08:15 बजे तक रहेगा, उसके बाद व्यतिपात योग बनेगा। प्रदोष व्रत पर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और श्रवण नक्षत्र भी होंगे। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर शाम को 6 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। उसके बाद श्रवण नक्षत्र का आरंभ होगा।

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मानसिक शांति के लिए: प्रदोष व्रत में जिस तरह से ताजगी और ऊर्जा की भावना होती है, वह केवल पूजा और व्रत के शारीरिक लाभ नहीं होते। यह व्रत मानसिक शांति को भी बढ़ाता है क्योंकि इसके दौरान व्यक्ति अपने आप से जुड़ता है और ध्यान केंद्रित करता है, जो तनाव और मानसिक समस्याओं को दूर करने में मदद करता है।

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प्राकृतिक ऊर्जा का इस्तेमाल: प्रदोष काल वह समय होता है जब सूर्य और चंद्रमा की ऊर्जा सामंजस्यपूर्ण होती है। यही कारण है कि प्रदोष व्रत से जुड़े कई लाभ तब महसूस होते हैं जब हम इस समय पूजा करते हैं। यह समय ऊर्जा का आदान-प्रदान करने का सर्वोत्तम समय होता है, और शिवजी की पूजा इस ऊर्जा को सकारात्मक रूप में हमारे जीवन में लाती है।

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कृषि और भूमि संबंधी कार्यों के लिए लाभकारी: विशेष रूप से कृषि के क्षेत्र में भी मंगल प्रदोष का बड़ा महत्व है। यह दिन भूमि की उर्वरता, फसल की वृद्धि और खेती-बाड़ी के कार्यों में लाभकारी होता है। अगर कोई व्यक्ति भूमि या कृषि कार्यों में संलग्न है तो उसे इस दिन पूजा करने से विशेष लाभ मिल सकता है।

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शिव के साथ आंतरिक शुद्धि: शिवजी की पूजा केवल बाहरी समृद्धि के लिए नहीं होती, बल्कि यह आंतरिक शुद्धि, आत्म साक्षात्कार और जीवन की गहरी समझ के लिए भी होती है। प्रदोष व्रत में ध्यान और साधना से मनुष्य अपने भीतर के अवगुणों को दूर करता है और आत्मा में शांति की प्राप्ति होती है।

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