Edited By Niyati Bhandari,Updated: 10 Sep, 2021 07:41 AM
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अष्टसिद्धि दायक गणपति सुख-समृद्धि, यश-ऐश्वर्य, वैभव, संकट नाशक, शत्रु नाशक, रिद्धि-सिद्धि दायक, ऋणहर्ता, विद्या-बुद्धि-ज्ञान तथा विवेक के प्रतीक माने जाते हैं। शिव पुराण के अनुसार गणेशावतार
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Ganesh chaturthi 2021 september: अष्टसिद्धि दायक गणपति सुख-समृद्धि, यश-ऐश्वर्य, वैभव, संकट नाशक, शत्रु नाशक, रिद्धि-सिद्धि दायक, ऋणहर्ता, विद्या-बुद्धि-ज्ञान तथा विवेक के प्रतीक माने जाते हैं। शिव पुराण के अनुसार गणेशावतार भाद्रपद के कृष्णपक्ष की चतुर्थी के दिवस पर हुआ था। शिव-पार्वती ने उन्हें अपनी परिक्रमा लगाने से प्रसन्न होकर सर्वप्रथम पूजे जाने का आशीष दिया था जो आज भी प्रचलित एवं मान्य है और सभी देवी-देवताओं के पूजन से पूर्व इनकी पूजा की जाती है। इस वर्ष शुक्रवार दिनांक 10.09.2021 को गणेश चतुर्थी महोत्सव है। बप्पा को धूमधाम से घर में विराजित किया जाता है। आईए जानें कैसे करें गणेश स्थापना पूजा
Ganesh Utsav puja vidhi: इस दिन प्रात:काल पूरे घर की साफ-सफाई कर लें दोपहर के समय स्नानादि से निवृत्त होने के बाद घर की उत्तर दिशा में लाल कपड़ा बिछाएं। कोरे कलश में जल भरकर तथा उसके मुंह पर कोरा कपड़ा बांधकर मिट्टी से बनी गणेश जी की मूर्ती स्थापित करें। गणेश जी की मूर्ति पर सिन्दूर चढ़ाकर षोडशोपचार से पूजन करें।
सर्वप्रथम दीप प्रज्ज्वलन करें।
जल चढ़ाकर आचमन करें।
पवित्रकरण - मूर्ति पर जल छिड़कें।
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फूलों का आसन चढ़ाएं।
स्वस्तिवाचन करें।
पूजा हेतु संकल्प लें।
गणपति जी का ध्यान करें।
गणेश जी का आवाहन करें।
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चावल चढ़ाकर प्रतिष्ठापन करें।
दूर्वा से जल छिड़क कर मूर्ति को स्नान करवाएं।
वस्त्र एवं उपवस्त्र चढ़ाएं।
सिन्दूर चढ़ाएं।
फूल चढ़ाएं।
दूर्वा चढ़ाएं।
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सुगंधित धूप और दीप के दर्शन करवाएं।
मोदक का भोग लगाएं।
दक्षिणा एवं श्री फल चढ़ाएं।
गणेश जी की आरती उतारें।
फूलों से पुष्पांजलि अर्पित करें।
भूलचूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
प्रणाम करके पूजा समर्पित करें।
श्रद्धा के अनुसार गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करें।