Edited By Prachi Sharma,Updated: 25 Mar, 2025 12:08 PM
पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन गणगौर का पर्व मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करती हैं
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Gangaur Vrat 2025: पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन गणगौर का पर्व मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करती हैं। यह व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है, जबकि कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर प्राप्त करने के लिए इस व्रत का पालन करती हैं। 2025 में गणगौर व्रत कब पड़ेगा, इसका शुभ मुहूर्त और पूजा विधि क्या है आइए विस्तार से जानते हैं।
गणगौर व्रत 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
गणगौर व्रत हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। 2025 में यह पर्व 31 मार्च को पड़ेगा। इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसे अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
शुभ मुहूर्त 2025
गणगौर पूजन तिथि: 31 मार्च 2025
ब्रह्म मुहूर्त: 4:40 ए.एम से 5:26 ए.एम तक
अमृत काल: 07:24 ए.एम से 08:48 ए.एम तक
अभिजीत मुहूर्त: 12:00 पी.एम से 12:50 पी.एम तक
निशिता मुहूर्त: 12:02 ए.एम, अप्रैल 01 से 12:48 ए.एम, अप्रैल 01 तक
गणगौर व्रत का महत्व
गणगौर व्रत मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि बनाए रखने के लिए किया जाता है। इस दिन महिलाएं विशेष रूप से 16 श्रृंगार करके मां गौरी की पूजा करती हैं और भगवान शिव से अपने पति की लंबी उम्र और समृद्धि की कामना करती हैं। कुंवारी कन्याएं भी यह व्रत रखती हैं ताकि उन्हें अच्छा वर प्राप्त हो। इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन में खुशियां आती हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
गणगौर व्रत की पूजा विधि
गणगौर व्रत की पूजा विधि बहुत ही सरल और भक्तिपूर्ण होती है। इस दिन विशेष रूप से मिट्टी या लकड़ी की गणगौर बनाकर उनकी विधिवत पूजा की जाती है।
पूजा की आवश्यक सामग्री:
गणगौर (गौरी माता) और ईश्वर (भगवान शिव) की मूर्ति
पानी से भरा कलश
आम के पत्ते
हल्दी, कुमकुम, रोली, चावल
धूप, दीप, अगरबत्ती
लाल और पीले रंग के फूल
मिठाई और फल
मेहंदी और कंगन
कलश और नारियल
पूजा विधि:
सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और संकल्प लें कि आप यह व्रत पूरे विधि-विधान से करेंगी।
गणगौर की प्रतिमा को सजाएं। मिट्टी से बनी मूर्तियों को सुंदर वस्त्र और आभूषणों से सजाया जाता है।
कलश की स्थापना करें। जल से भरा कलश रखें और उसके ऊपर आम के पत्ते व नारियल रखें।
गौरी माता का पूजन करें। हल्दी, कुमकुम, अक्षत, फूल, धूप, दीप और प्रसाद अर्पित करें।
गणगौर गीत गाएं। महिलाएं पारंपरिक गीत गाकर माता गौरी की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करती हैं।
जल अर्पण करें। कुंवारी कन्याएं और सुहागिन महिलाएं अपने घर के आंगन में जल अर्पण करती हैं।
व्रत कथा का पाठ करें। गणगौर की कथा सुनना इस व्रत का महत्वपूर्ण अंग होता है। कथा सुनने के बाद सभी को प्रसाद वितरित करें।
गणगौर विसर्जन। व्रत के समापन पर गौरी माता की प्रतिमा को किसी जल स्रोत (तालाब, नदी) में विसर्जित किया जाता है।