Edited By Sarita Thapa,Updated: 31 Mar, 2025 02:17 PM

Gautam Buddha Inspirational Story: भगवान गौतम बुद्ध भिक्षाटन के लिए एक गांव में पहुंचे। वहां कुछ दूरी पर एक नदी बहती थी। उस नदी के कारण वह इलाका काफी उपजाऊ था, इसलिए वहां खुशहाली थी।
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Gautam Buddha Inspirational Story: भगवान गौतम बुद्ध भिक्षाटन के लिए एक गांव में पहुंचे। वहां कुछ दूरी पर एक नदी बहती थी। उस नदी के कारण वह इलाका काफी उपजाऊ था, इसलिए वहां खुशहाली थी। नदी के दोनों तटों पर विभिन्न समुदायों के लोग रहते थे। उनमें एक-दूसरे के लिए प्रेम और सम्मान था। वे किसी भी संकट का मिलकर सामना करते थे। एक बार गर्मी के मौसम में उनमें तनाव पैदा हो गया।
हुआ यह कि इस बार कुछ ज्यादा ही गर्मी पड़ी थी। नदी में जल की मात्रा काफी कम हो गई इसलिए एक तट पर बसने वाले लोग नदी से पानी अपने खेतों में पहुंचाने के लिए एक नहर निकालने की कोशिश करने लगे। दूसरे तट पर रहने वाले ग्रामवासियों ने उन्हें रोकते हुए कहा कि यदि नहर निकालकर पानी को अपने खेतों में ले जाओगे तो हमारा क्या होगा?
इस प्रकार दोनों तटों पर रहने वाले लोगों के बीच नदी के पानी को लेकर झगड़ा शुरू हो गया। दोनों दलों के लोग लाठियां ले आए।
उनके झगड़े का शोर सुनकर गौतम बुद्ध वहां आए और उन्होंने उन लोगों से पूछा, “ग्रामवासियों पानी का मूल्य क्या होता है?”

दोनों दलों के लोगों ने जवाब दिया, “भगवन प्रकृति के उपहार पानी का तो कोई मूल्य नहीं है।”
फिर बुद्ध ने पूछा, “और प्यारे भाइयो, मनुष्य के रक्त का क्या मूल्य है?”
दोनों दलों के लोग इस प्रश्न पर चुप हो गए। फिर उनमें से एक ने कहा, “भगवन, हम आपका आश्य समझ गए हैं। हमें पानी के लिए एक-दूसरे का रक्त नहीं बहाना चाहिए।”
इस तरह बुद्ध के हस्तक्षेप से पानी पर रक्तपात होते-होते बचा। दोनों किनारों के लोगों ने मिलकर अपनी आवश्यकता के हिसाब से पानी खर्च करने का निर्णय किया। इसने एक परम्परा का ही रूप ले लिया। बाद में जब भी सूखा पड़ता, लोग उसी तरह मिलजुल कर पानी का उपयोग करते।
