Edited By Niyati Bhandari,Updated: 29 Sep, 2023 08:40 AM
भारत के तीर्थों में चित्रकूट को इसलिए भी गौरव प्राप्त है क्योंकि इसी में भक्तराज हनुमान की सहायता से भक्त शिरोमणि तुलसीदास को प्रभु श्री राम के दर्शन हुए। चित्रकूट
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Hanuman Dhara Chitrakoot: भारत के तीर्थों में चित्रकूट को इसलिए भी गौरव प्राप्त है क्योंकि इसी में भक्तराज हनुमान की सहायता से भक्त शिरोमणि तुलसीदास को प्रभु श्री राम के दर्शन हुए। चित्रकूट का विकास राजा हर्षवर्धन के जमाने में हुआ। यूं तो भारत में हनुमान जी के एक से बढ़कर एक भव्य मंदिर हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के बांदा से लगे मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित चित्रकूट धाम के हनुमान धारा मंदिर की बात ही कुछ निराली है।आज भी यहां हनुमान जी की बाईं भुजा पर लगातार जल गिरता दिखाई देता है। यहां विराजे हनुमान जी की आंखों को देख कर ऐसा लगता है, मानो हमें देख कर वह मुस्कुरा रहे हैं। साथ में भगवान श्री राम का छोटा सा मंदिर भी यहां है। इस धारा का जल हनुमान जी को स्पर्श करता हुआ बहता है, इसीलिए इसे हनुमान धारा कहते हैं। इसके दर्शन से प्रत्येक व्यक्ति तनाव मुक्त हो जाता है तथा मनोकामना भी पूर्ण होती है।
ऐसी कथा है कि श्रीराम के अयोध्या में राज्याभिषेक होने के बाद एक दिन हनुमान जी ने भगवान श्री राम से कहा, ‘‘हे प्रभु लंका को जलाने के बाद तीव्र अग्नि से उत्पन्न गर्मी मुझे बहुत कष्ट दे रही है। इस कारण मैं कोई अन्य कार्य करने में बाधा महसूस कर रहा हूं। मुझे कोई ऐसा उपाय बताएं जिससे मैं इससे मुक्ति पा सकूं।’’
तब प्रभु श्री राम ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘‘चिंता मत करो। आप चित्रकूट पर्वत पर जाइए। वहां आपके शरीर पर अमृत तुल्य शीतल जलधारा के लगातार गिरने से आपको इस कष्ट से मुक्ति मिल जाएगी।’’ हनुमान जी ने चित्रकूट आकर विंध्य पर्वत शृंखला की एक पहाड़ी में श्री राम रक्षा स्त्रोत का 1008 बार पाठ किया।
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जैसे ही उनका अनुष्ठान पूरा हुआ, ऊपर से जल की एक धारा प्रकट हुई, जिसके पड़ते ही हनुमान जी के शरीर को शीतलता प्राप्त हुई। आज भी यहां वह जल धारा निरंतर गिरती है, जिस कारण इस स्थान को हनुमान धारा के रूप में जाना जाता है। धारा का जल पहाड़ में ही विलीन हो जाता है, उसे लोक प्रभाती नदी या पाताल गंगा कहते हैं।
हनुमान धारा के बारे में एक अन्य कहानी यह है कि लंका में आग लगाने के बाद अपनी पूंछ में लगी आग बुझाने के लिए श्री हनुमान जी इस जगह आए। कहा जाता है कि जब हनुमान जी ने लंका में अपनी पूंछ से आग लगाई थी तब उनकी पूंछ पर भी बहुत जलन हो रही थी। राम राज्य में भगवान श्री राम से हनुमान जी ने विनती की, जिससे अपनी जली हुई पूंछ का इलाज हो सके। तब श्री राम ने अपने बाण के प्रहार से इसी जगह पर एक पवित्र धारा बनाई।
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एक चमत्कारिक पवित्र और ठंडी जल धारा पर्वत से निकल कर हनुमान जी की मूरत की पूंछ को स्नान कराकर नीचे कुंड में चली जाती है। यह जगह पर्वत माला पर विंध्य की शुरूआत में राम घाट से 4 किलोमीटर दूर है। हनुमान धारा पर आपको हनुमान जी का मंदिर देखने के लिए मिलता है, जो ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। हनुमान जी के मंदिर के ऊपर सीता जी की रसोई है, जहां पर सीता जी ने ऋषियों के लिए खाना बनाया था। यहां पर आपको बहुत सारे मंदिर देखने के लिए मिल जाते हैं।
हनुमान धारा मंदिर की जहां से सीढ़ियां शुरू होती हैं, वहां पर आपको बंदर मिलने शुरू हो जाते हैं। सीढ़ियों के एक तरफ आपको हनुमान जी की मूर्ति और दूसरी तरफ गणेश जी की मूर्ति देखने को मिलती है।
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आप ऊपर जाएंगे, तो आपको यहां पर राम जी, लक्ष्मण जी और सीता जी की भव्य मूर्तियां देखने को मिलती है। यहां से आपको नीचे का मनोरम नजारा देखने को मिलता है।
आप सीढ़ियों से ऊपर जाएंगे, तो आपको यहां पर हनुमान जी का मुख्य मंदिर देखने को मिलेगा, जिसके नीचे ही आपको जलधारा दिख जाएगी। आप इस जल को पी सकते हैं। यह जल धारा गर्मियों के समय भी बहती है।
हनुमान जी की भव्य मूर्ति यहां विराजमान है। आप उनके दर्शन कर सकते हैं। यहां पर आपको हनुमान जी की गदा देखने के लिए भी मिल जाती है। यहां पर सीता जी का मंदिर भी है।
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सीता रसोई चित्रकूट : सीता रसोई में आपको सीता जी के बर्तन देखने को मिलते हैं। यहां पर सीता जी ने 5 ब्राह्मणों को भोजन कराया था। यहां बेलन और चौकी भी देखने को मिलेंगे। यहां पर और भी मंदिर देखने को मिलते हैं। यहां से आप दूर-दूर तक का खूबसूरत नजारा देख सकते हैं। सीता रसोई तक आप गाड़ी से भी आ सकते हैं।
रोपवे हनुमान धारा चित्रकूट : हनुमान धारा में रोपवे की सुविधा भी उपलब्ध है। अगर किसी को सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी होती है, तो वह रोपवे के द्वारा भी हनुमान धारा में हनुमान जी के दर्शन करने के लिए जा सकता है।
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पहुंचने का तरीका
वायु मार्ग द्वारा : चित्रकूट के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट प्रयागराज है, यहां से आप बस द्वारा चित्रकूट पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग द्वारा : चित्रकूट पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी स्टेशन 8 कि.मी. दूर कर्वी है। यहां से आप बस या कार द्वारा चित्रकूट पहुंच सकते हैं।
सड़क मार्ग द्वारा : सड़क मार्ग द्वारा चित्रकूट आने के लिए इलाहाबाद, बांदा, झांसी, महोबा, कानपुर, छतरपुर, सतना, फैजाबाद, लखनऊ, मैहर आदि प्रमुख शहरों से नियमित बस सेवा उपलब्ध है।