Edited By Jyoti,Updated: 05 Jul, 2020 06:36 PM
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कोरोना महामारी के चलते जहां एक तरफ़ कई मंदिर बंद थे, तो वहीं कुछ मंदिरों की समिति ने लोगों की आस्था को ध्यान में रखते हुए कुछ नियमों आदि के तहत भगवान के प्रसाद आदि को वितरित किया गया।
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कोरोना महामारी के चलते जहां एक तरफ़ कई मंदिर बंद थे, तो वहीं कुछ मंदिरों की समिति ने लोगों की आस्था को ध्यान में रखते हुए कुछ नियमों आदि के तहत भगवान के प्रसाद आदि को वितरित किया गया। तो वहीं एक ऐसा भी मंदिर था जो कोरोना नें न केवल खुला बल्कि इसके गर्भगृह को एक अद्भुत तरीके से सजाया गया। हम बात करे रहे हैं महाराष्ट्र के खंडोबा मंदिर की, जहां कोरोना महामारी के बीच लॉकडाऊन के स्थिति में मंदिर के पुजारियों द्वारा भक्तों में प्रसाद भी बांटा गया। खबरों के अनुसार इस दौरान मंदिर के बहुत सूंदरता से अंगूरों की बेल से सुसज्जित कर भगवान को 101 क्विंटल अंगूर अर्पित किए गए।
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यही नहीं अब भोग में लगे इन अंगूरों को अलग-अलग हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों और रिलीफ कैम्प में रहने वालों को प्रसाद के रूप में पहुंचाने का प्रयास भी किया जाएगा। ताकि भगवान के आशीर्वाद से सभी भगवान जल्द से जल्द ठीक हो जाएं।
हैरान कर देने वाली है मंदिर की कहानी
मंदिर महाराष्ट्र के पुणे जिले में जेजुरी नामक नगर में है। इसे खंडोबा मंदिर के नाम से जाना जाता है। मराठी में इसे 'खंडोबाची जेजुरी' यानि खंडोबा की जेजुरी कहकर पुकारा जाता है। मंदिर एक छोटी-सी पहाड़ी पर 718 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। और यहां तक पहुंचने के लिए दो सौ के करीब सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। इस मंदिर को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं, जो आपको हैरान कर देंगी। आपको बता दें कि इस मंदिर में विराजमान देवता को भगवान खंडोबा कहा जाता है। उन्हें मार्तण्ड भैरव और मल्हारी जैसे अन्य नामों से भी जाना जाता है, जो भगवान शिव का ही दूसरा रूप है। भगवान खंडोबा की मूर्ति घोड़े की सवारी करते एक योद्धा के रूप में है। उनके हाथ में राक्षसों को मारने के लिए कि एक बड़ी सी तलवार है।
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मंदिर में दांतों से 42 किलो की तलवार उठाने की होती है प्रतिस्पर्धा
खंडोबा मंदिर दुनिया भर में मशहूर है। यहां हर साल दशहरे पर होने वाले हल्दी उत्सव को मनाने दूर-दूर से लोग आते हैं। इस दौरान हल्दी से पूरा मंदिर सोने की तरह चमक उठता है। इसके अलावा, यहां 42 किलो की तलवार उठाने की प्रतिस्पर्धा खास होती है, क्योंकि श्रद्धालु इसे अपने दांतों से उठाते हैं। इस साल एक श्रद्धालु ने एक व्यक्ति को पीठ पर बैठाकर 42 किलो वजनी तलवार उठाई।
खंडोबा मंदिर मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित है। पहला भाग मंडप कहलाता है जबकि दूसरे भाग में गर्भगृह है, जिसमें भगवान खंडोबा की मूर्ति स्थापित है। हेमाड़पंथी शैली में बने इस मंदिर में पीतल से बना एक बड़ा सा कछुआ भी है। इसके अलावा मंदिर में एतिहासिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण कई हथियार भी रखे गए हैं। दशहरे के दिन यहां भारी भरकम तलवार को दांत के सहारे अधिक समय तक उठाए रखने की एक प्रतियोगिता भी होती है, जो बहुत प्रसिद्ध है। मान्यता है कि धरती पर मल्ल और मणि नाम के दो राक्षस भाईयों का अत्याचार काफी बढ़ गया था, जिसे खत्म करने के लिए भगवान शिव ने मार्तंड भैरव का अवतार लिया था। कहते हैं कि भगवान ने मल्ला का सिर काट कर मंदिर की सीढ़ियों पर छोड़ दिया था जबकि मणि ने मानव जाति की भलाई का वरदान भगवान से मांगा था, इसलिए उसे उन्होंने छोड़ दिया। इस पौराणिक कथा का उल्लेख ब्रह्माण्ड पुराण में मिलता है।
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