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Phulera Dooj : कुछ ऐसे मनाया जाता है दोष मुक्त दिन फुलेरा दूज

Edited By Niyati Bhandari,Updated: 28 Feb, 2025 08:39 AM

phulera dooj

Phulera Dooj 2025: फुलेरा दूज (Phulera Dooj) एक महत्वपूर्ण और मनमोहक पर्व है, जो हिन्दू कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन शुक्ल द्वितीया को मनाया जाता है। यह पर्व खासतौर पर उत्तर भारत उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।...

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Phulera Dooj 2025: फुलेरा दूज (Phulera Dooj) एक महत्वपूर्ण और मनमोहक पर्व है, जो हिन्दू कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन शुक्ल द्वितीया को मनाया जाता है। यह पर्व खासतौर पर उत्तर भारत उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। फुलेरा दूज पर्व श्रीराधाकृष्ण को समर्पित है। इसे रंग-बिरंगे फूलों और खुशियों के साथ मनाने की परंपरा है। इस पर्व का धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व है, जो लोगों के दिलों में विशेष स्थान रखता है। ज्योतिष विद्वान कहते हैं फुलेरा दूज दोष मुक्त दिन है। इस रोज़ पंचांग देखने की अवश्यकता नहीं होती। इसका हर क्षण शुभता लेकर आता है। ब्रज भूमि में इस उत्सव की बहुत धूम मचती है। श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में इस दिन से ही होली की शुरुआत होती है। आज के दिन राधाकृष्ण की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में हमेशा खुशियों के रंग भरे रहते हैं।

Phulera Dooj
फुलैरा दूज कैसे मनाते हैं ?
Phulera Dooj Importance-
शहरों में चाहे इस त्यौहार की धूम न रहती हो लेकिन गांव में इसकी रौनक किसी पर्व से कम नहीं होती। घरों में भी फूलों की रंगोली सजाई जाती है और अन्य साज-सज्जा भी फूलों द्वारा की जाती है। मिष्ठान बना कर सर्वप्रथम भगवान को भोग लगाएं। फिर जितना संभव हो उस प्रसाद को बांटे और अंत में स्वयं ग्रहण करें।

Phulera Dooj method of worship: फुलैरा दूज पर अबूझ मुहूर्त होता है। इस रोज किसी भी शुभ काम के लिए पंचांग देखने की अवश्कता नहीं होती। कोई भी नया काम शुरू करना हो या किसी नए रिश्ते का आरंभ करना फुलैरा दूज के शुभ मुहूर्त में किया जा सकता है। विवाह बंधन में बंधने के लिए तो ये दिन सर्वोत्तम माना गया है। शादी करने के लिए तो यह शीत ऋतु का अंतिम दिन है।

Phulera Dooj
Phulera Dooj rituals: ज्योतिष विद्वान फुलैरा दूज के दिन के बारे में कहते हैं इस दिन मुहूर्त व लग्र निकालने की जरूरत नहीं होती। सीधे कोई भी काम किसी भी वक्त पर किया जा सकता है। जिन लोगों की शादी का लग्न नहीं निकल पाता वे इस दिन बिना किसी लग्न देखे शादी कर सकते हैं।

House decorated with decorations and flowers on Phulera Dooj फुलेरा दूज पर सजावट और फूलों से सजा घर: इस दिन घर को फूलों और रंग-बिरंगे पताकों से सजाया जाता है। विशेष रूप से गेंदा, गुलाब, चंपा और रजनीगंधा जैसे रंग-बिरंगे फूलों का उपयोग किया जाता है।

Bathing and worship on Phulera Dooj फुलेरा दूज पर स्नान और पूजा: इस दिन के अवसर पर स्नान करके विशेष पूजा करने का विधान है, जिसमें फूलों की देवी वसुंधरा की पूजा की जाती है। लोग अपने घरों में अच्छे कार्यों की शुरुआत करने के लिए विशेष पूजा करते हैं।

Phulera Dooj
Phulera Dooj is a festival of happiness and love फुलेरा दूज है खुशियों और प्रेम का उत्सव: घरों में पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं जैसे पूड़ी, कचोरी, मिठाई, हलवा आदि और परिवार के सदस्य एक साथ मिलकर इस पर्व का आनंद लेते हैं।

Cultural and Social Aspects of Phulera Dooj फुलेरा दूज का सांस्कृतिक और सामाजिक पहलू: फुलैरा दूज को मनाने की परंपरा बहुत गहरी है, विशेष रूप से छोटे गांवों और कस्बों में यह पर्व सामाजिक सामूहिकता का प्रतीक है। परिवारों में यह दिन सभी के साथ सामूहिक रूप से मनाया जाता है और यह समाज के समन्वय को बढ़ावा देता है।

Traditional Food on Phulera Dooj फुलेरा दूज पर पारंपरिक भोजन: फुलैरा दूज के दिन खीर, गुड़, तिल और विशेष रूप से गेंदे का हलवा, जो एक खास पकवान है, बनाए जाने का विधान है। यह पकवान इस दिन की मिठास को बढ़ाने में मदद करते है। यह बेहद ही स्वादिष्ट और पौष्टिक होते हैं। इस रोज विशेष रुप से मंदिरों में श्रीकृष्ण और राधा रानी के साथ फूलों की होली खेली जाती है। उसके बाद भोग स्वरुप उन्हें माखन मिश्री का भोग लगाते हैं।

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