इमोशनल ही नहीं, एंटरटेनमेंट से भी भरपूर है उत्कर्ष शर्मा और सिमरत कौर की 'vanvaas'

Edited By Diksha Raghuwanshi,Updated: 26 Mar, 2025 12:45 PM

vanvaas is not only emotional but also full of entertainment

फिल्म 20 दिसंबर को ओटीटी पर रिलीज हो चुकी है। फिल्म में नाना पाटेकर, राजपाल यादव जैसे कई कलाकार शामिल है और इस फिल्म के डायरेक्टर हैं अनिल शर्मा।

मुंबई। फैमिली को लेकर बॉलीवुड में कई फिल्में बनाई गई, लेकिन आज की जनरेशन को फैमिली का सही मतलब समझाने आ रही है फिल्म 'वनवास'। फिल्म 20 दिसंबर को ओटीटी पर रिलीज हो चुकी है। फिल्म में नाना पाटेकर, राजपाल यादव जैसे कई कलाकार शामिल है और इस फिल्म के डायरेक्टर हैं अनिल शर्मा। इसी के चलते फिल्म में 'वीरेंद्र' का रोल प्ले करने वाले उत्कर्ष शर्मा और 'मीना' का रोल प्ले करने वाली सिमरत कौर रंधावा ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी, और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश:  

उत्कर्ष शर्मा

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1- कितने एक्साइटेड हो आप अपनी इस फिल्म के लिए?

जब ये पिक्चर की शुरुआत की थी जब स्क्रिप्टिंग हो रही थी तो ये एक ऐसी फिल्म है जिसका सब्जेक्ट मैटर है वो बहुत मुझे टचिंग लगा। मुझे लगा कि ये एक बहुत महत्वपूर्ण प्रॉब्लम है हमारे देश की जो कोई नहीं बता रहा जिसके बारे में कोई बात नहीं कर रहा। हर दो-तीन हफ्ते में हम कोई ऐसी न्यूज़ देखते हैं जहां पर पेरेंट्स के साथ कुछ अत्याचार हो रहा है, उन्हे घर से निकाल दिया जा रहा है। और बात ये है कि हमें दुनिया को आइना दिखाने की जरूरत है। हम किसी भी तरह की फिल्म कभी भी बना सकते हैं लेकिन जो सोसाइटी को दिखाती है फिल्म में वो बहुत कम बनती हैं और बहुत महत्वपूर्ण होती है। तो गदर 2 के प्यार के बाद हमें ये चीज तो डेफिनेट थी कि हम ये फिल्म बनाएंगे जो पूरी फैमिली को और क्लोज ले आए। जो एक सोसाइटी की प्रॉब्लम दिखा बच्चों के अपने मां-बाप को और क्लोज लाएगी और फिल्म के एंड में या तो आप अपने मां-बाप को गले लगाना चाहेंगे अगर आपको साथ हैं या एक फोन कॉल पर आप उनको आई लव यू या आई मिस यू जरूर बोलना चाहेंगे। इसलिए हमने इस फिल्म को चुना और ओटीटी जी 5 के साथ हम ज्यादा दर्शकों तक पहुंच सकते हैं।

2 - क्या आपको लगता है कि फिल्म की रिलीज डेट भी मैटर करती है, क्योंकि अभी कुंभ के दौरान बहुत से ऐसे इंसीटेड सुनने में आए जहां मां-बाप को छोड़कर चले गए बच्चे, तो ऐसे में ये फिल्म इम्पैक्ट छोड़ेगी लोगों पर?

बिल्कुल, जब हम फिल्म की प्रमोशन भी कर रहे थे और शूटिंग भी कर रहे थे बनारस में हमने खुद ऐसे केस देखे। हमने मथुरा, वृंदावन हर जगह शूट किया तो वहां की भी हमें ग्राउंड रिएलीटी पता है कि विधवाओं को छोड़ दिया जाता है। धर्मस्थल पर कम से कम आपको कोई दो रोटी दे दे।  इंटरव्यू में भी हम बात कर रहे थे कि कुंभ में ऐसा कुछ ना हो लेकिन ये दर्दनाक कहानियां हो ही जाती है। जब आप फैमिली वैल्यूज को सामने नहीं लाओगे, फिल्मों के द्वारा, वीडियो के द्वारा तो लोगों में वो भावना रहेगी नहीं। और इंडिविजुअल स्टिक, मटेरियलिस्टिक, माइंडसेट तो बहुत होता जा रहा है लोगों का। जितने वेसटर्नाइज हम हो रहे है, लिबरल हो रहे है जितने, तो हम एकदम ही कंजर्वेटिव वैल्यू को डिटेच नहीं कर सकते। में-बाप कैसे भी हो उन्होंने सब सेक्रिफाइज किस करके आपको पाला है। कहानी का मैसेज भी है कि माता-पिता का कर्म है बच्चों को पालना, पर बच्चों का धर्म है मां-बाप को संभालना। ये जो कहानियां है, ये जो इमोशनल है ये हर जगह वर्क करेगा। जो गलत हो रहा है उसे लोग ठीक करेंगे और जो अपने मां-बाप से प्यार करते हैं वो और क्लोज आ जाएंगे

3 - मीना को वीरू को क्या समझाने की जरूरत पड़ रही है?

वीरू आज के जमाने का बनारसी ठग है। वो फिल्म में लोगों के बटवे चोरी करता भी दिखाई देगा। उसका एक छोटा सा गैंग है जिसमें राजपाल सर, सत्येंद्र सोनी ये सब इसके थोड़े कॉमेडी वाले किरदार है जो चोरी चकारी में इसकी मदद करते हैं। ये सोसायटी का एक रिजेक्ट पर्सन है अनाथ है। वो मीना से प्यार तो करता है लेकिन जताना नहीं जानता। इसको जो बूरी आदतें हैं इन सब से मीना चिढ़ी रहती है और जब ये चिढ़ती है तो मैं दूसरी लड़कियों से बात करने लग जाता हूं। 

4 -  अनिल आपके पहले डायरेक्टर है और आपके पापा भी है तो फिल्म सेट पर वो पापा की तरह रहते है या डायरेक्ट की तरह?

वो हमेशा एक डायरेक्टर की तरह रहते हैं। घर में भी वो 70% डायरेक्ट की तरह ही रहते है और 30% पापा की तरह। एक डायरेक्टर को बहुत सी चीजों का ध्यान रखना पड़ता है। पापा ज्यादातर बिजी रहते है लेकिन इससे मुझे भी मोटिवेशन मिलती है। सेट पर वो एक डायरेक्टर की तरह ही पेश आते हैं। मुझे कोई फेवरेटिज्म नहीं मिलती। मैं और पापा एक ही वैन शेयर करते हैं 

5 - ये फिल्म लोगों को क्यों देखनी चाहिए?

ये फैमिली की फिल्म है और आप पूरे परिवार के साथ इसको बेझिझक इसको देख सकते हैं। ये फिल्म आपको हंसाएंगी भी और कुछ पल रुलाएगी भी। इसमें एंटरटेनमेंट के साथ साथ इमोशन भरपूर है। तो आप इंजॉय करेंगे फिल्म और मैसेज भी आपको कब परोस दिया जाएगा पता नहीं चलेगा। 

सिमरत कौर रंधावा

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1- सिमरत आप इस चीज को नजरअंदाज नहीं कर सकते कि ऐसे सब्जेक्ट मैटर पर बहुत सी फिल्म बन भी चुकी है तो वनवास ऐसा क्या अलग लेकर आती है जो हम देख चुके है उससे अलग है? 

हमने 70s-80s का जमाना नहीं देखा, वो हमारे पेरेंट्स के यंग डेयस होगं जब उन्होंने देखी होगी। अगर बागबान की बात करें तो हम उस काइम इतने छोटे थे कि उस फिल्म को समझ नहीं सकते थे।  लेकिन अब मैं उस होशो हवास में हूं की फिल्में समझ सकती हूं। ऐसी फिल्मे हर 15-20 साल बाद बनती रहनी चाहिए एक रिमाइंडर के लिए। हर कहानी में मां-बाप और बच्चों का प्यार दिखाया जाता है फर्क बस इतना है कि आप उसे कैसे दर्शाते हो। एक मां,बेटे और बाप की लव स्टोरी हमेशा सेम होगी, लेकिन आप कौन सा रास्ता चुनते हो, किस किस्म का प्यार दिखाते हो वो निर्भर करता है। और वनवास सिर्फ इमोशनल नहीं  है इसमें एंटरटेनमेंट भी है। जब आप फिल्म को थिएटर में बैठ कर भी देखोगे तो आप बोर नहीं होंगे। 

2- बात करें आपको किरदार की तो 'मीना' कैसी है?

मीना एक बनारसी लड़की है, जो बिलकुल आज के जमाने की लड़की है, जिसको सोशल मीडिया बहुत पसंद है। मीना बहुत नौटंकी है, उसे डांस पसंद है उसका एक डांस शो भी होता है जहां वो वीरेंद्र से मिलती है। मुझे बनारसी सीखने में टाइम लगा लेकिन जो भी मैं इस किरदार के लिए कर पाई वो मैने किया। मीना का काम ही वीरेंद्र को बदलना था। 

3 - आपके एक्सपीरियंस की बात करें तो ये आप दोनो की एक साथ दूसरी फिल्म है, आपकी केमिस्ट्री को लोगों ने पहने भी एप्रीशिएट किया, तो दूसरा बार एक साथ शूट करना कैसा रहा? 

ये मेरी पहली फास्टेस्ट फिल्म है और पता चला कि ये नाना पाटेकर की भी फास्टेस्ट फिल्म है, हम तो बस शूट कर रहे थे और पता लगा कि ये तो खत्म हो गई। इतना आसान था, मौज-मस्ती से भरा रहा। बनारस एक फन प्लेस है । खाना भी बहुत अच्छा है वहां, वहां से शूट करने के बाद हम शिमला गए वहां बर्फ पड़ रही थी एक दम ठंडा था वो भी एक अलग फन था। दो-ढाई महीने में शूटिंग खत्म हो गई थी। नाना सर सेट की जान थे, वे सोट पर सबके लिए कूकिंग भी करते थे, सौ-दो सौ लोगों के लिए वो खाना बना लेते थे। ये शूट एक पिकनिक जैसा था जिसमें हमने थोड़ा काम किया।

4 - सिमरत ये फिल्म लोगों को क्यों देखनी चाहिए?

ये एक क्यूट लिटिल एंटरटेनमेंट रिमाइंडर है फैमिली इमोशनस के बारे में। ये बहुत सारे एंटरटेनमेंट और इमोशनस के साथ बनी है। ये कोई सीरियस मूवी नहीं हैं।

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