Edited By Parminder Kaur,Updated: 27 Feb, 2025 03:05 PM
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उत्तर-पश्चिमी कांगो के इक्वेटर प्रांत में पिछले पांच हफ्तों में 50 से अधिक लोगों की मौत हो गई है, जिससे हड़कंप मच गया है। इन मौतों के पीछे एक अजीब लक्षण सामने आया है और वह लगातार रोना था, जिन लोगों की मौत हुई। वे बहुत तेजी से बीमार हुए थे और कुछ...
इंटरनेशनल डेस्क. उत्तर-पश्चिमी कांगो के इक्वेटर प्रांत में पिछले पांच हफ्तों में 50 से अधिक लोगों की मौत हो गई है, जिससे हड़कंप मच गया है। इन मौतों के पीछे एक अजीब लक्षण सामने आया है और वह लगातार रोना था, जिन लोगों की मौत हुई। वे बहुत तेजी से बीमार हुए थे और कुछ घंटों में उनकी मौत हो गई। अब अधिकारी इन मौतों के कारणों की जांच कर रहे हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या यह घटनाएं आपस में जुड़ी हुई हैं।
इन मामलों को बोलोको और बोमेट के दो अलग-अलग स्थानों पर दर्ज किया गया है। बोलोको में तीन बच्चों की मौत हुई थी यह पाया गया कि उन्होंने चमगादड़ खाया था और 48 घंटों के भीतर उनकी मौत हो गई। वहीं बोमेट में 400 से अधिक लोग बीमार हो गए और कुछ में मलेरिया की पहचान की गई है।
कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, लगभग 80% रोगियों में बुखार, ठंड लगना, शरीर में दर्द और दस्त जैसे सामान्य लक्षण दिखाई दिए हैं। इसके अलावा गर्दन और जोड़ों में दर्द, पसीना आना और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण भी दिखे। 59 साल से कम उम्र के रोगियों को तेज प्यास लग रही थी, जबकि बच्चे लगातार रो रहे थे। शुरुआती जांच में इबोला जैसी बीमारियों की संभावना जताई गई थी, लेकिन बाद में उसे खारिज कर दिया गया।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी इस बीमारी पर काम कर रहा है। मलेरिया, वायरल बुखार, खाने या पानी में विषाक्तता, टाइफाइड बुखार और मेनिन्जाइटिस जैसे संभावित कारणों की जांच की जा रही है। कांगो सरकार ने 14 फरवरी को इस वायरल बीमारी की जांच करने और इसके फैलने से रोकने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम प्रभावित क्षेत्रों में भेजी थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बोलोको में पहले बच्चों में बीमारी के मामले आए थे, जिन्होंने चमगादड़ खाया था। इसके बाद से लोगों में चिंता बढ़ गई है कि यह बीमारी जानवरों से इंसानों में फैल सकती है। WHO का कहना है कि पिछले एक दशक में अफ्रीका में इस तरह के मामलों में 60% की वृद्धि देखी गई है और इसका एक कारण यह हो सकता है कि लोग अब जंगलों और वन्यजीवों के करीब जाने लगे हैं।