Edited By Rohini Oberoi,Updated: 28 Feb, 2025 02:18 PM
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अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के बाद से सेना में ट्रांसजेंडर सैनिकों के लिए एक नया संकट खड़ा हो गया है। पेंटागन ने आदेश दिया है कि 30 दिनों के भीतर ट्रांसजेंडर सैनिकों का पता लगाया जाए और उन्हें सेना से निकाल दिया जाए। इस आदेश के तहत पेंटागन ने 26 मार्च...
इंटरनेशनल डेस्क। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के बाद से सेना में ट्रांसजेंडर सैनिकों के लिए एक नया संकट खड़ा हो गया है। पेंटागन ने आदेश दिया है कि 30 दिनों के भीतर ट्रांसजेंडर सैनिकों का पता लगाया जाए और उन्हें सेना से निकाल दिया जाए। इस आदेश के तहत पेंटागन ने 26 मार्च 2025 तक जेंडर डिस्फोरिया (लिंग पहचान की समस्या) से पीड़ित सैनिकों को पहचानने और उन्हें सेना से निकालने की प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया है।
सैन्य सेवा से निकाले जाएंगे ट्रांसजेंडर सैनिक
यह आदेश राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में जारी एक कार्यकारी निर्देश पर आधारित है जिसमें ट्रांसजेंडर्स को सेना में सेवा देने से प्रतिबंधित किया गया था। इस नीति को कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन अब पेंटागन ने इसे लागू करने के लिए कदम उठाए हैं। अनुमान है कि सेना में वर्तमान में 4,200 ट्रांसजेंडर सैनिक सक्रिय हैं। ये सैनिक अपने मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर पहचाने जा सकते हैं जो कुल 2.1 मिलियन सक्रिय सैनिकों का एक छोटा हिस्सा है।
ट्रांसजेंडरों के प्रति शत्रुता का आरोप
पेंटागन के एक सीनियर अधिकारी का कहना है कि जेंडर डिस्फोरिया से पीड़ित सैनिकों को सेना के मानसिक और शारीरिक मानकों को पूरा नहीं करना चाहिए। इसी कारण उन्हें सेना से बाहर निकाला जाएगा। हालांकि ट्रांसजेंडर सैनिकों का कहना है कि यह नीति उनके साथ शत्रुता का व्यवहार करती है और उन्हें असमान मानती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह नीति उनके मानवीय अधिकारों का उल्लंघन करती है और उन्हें समाज में शर्मिंदा करती है।
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ट्रांसजेंडर सैनिकों के लिए मुसीबत
मानवाधिकार अभियानों में कानूनी मामलों की उपाध्यक्ष सारा वारबेलो ने कहा कि इस नीति के तहत ट्रांसजेंडर सैनिकों पर दबाव डाला जा रहा है। उन्हें अपनी पहचान उजागर करने की आवश्यकता होगी जिससे उनकी निजता का उल्लंघन होगा। उदाहरण के लिए अगर कोई महिला ट्रांसजेंडर सैनिक है तो उसे अपने पुरुष साथी सैनिकों के सामने महिला होने का दावा करना पड़ेगा। यह सैनिकों के लिए एक कठिन स्थिति पैदा करता है क्योंकि उन्हें अपनी पहचान को लेकर तनाव और डर महसूस हो सकता है।
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मेडिकल रिकॉर्ड से होगी पहचान
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार अनुमान है कि करीब 600 ट्रांसजेंडर सैनिक नौसेना में हैं, जबकि सेना में लगभग 300 से 500 ट्रांसजेंडर सैनिक हो सकते हैं। इन सैनिकों को मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर पहचाना जाएगा। इसके बाद उन्हें सेना से बाहर निकाला जाएगा जैसा कि राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश में बताया गया है।
वहीं इस नीति के बाद ट्रांसजेंडर सैनिकों की स्थिति और अधिकारों पर सवाल खड़े हो गए हैं। कई अधिकार समूहों ने इसे भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताया है और इसकी आलोचना की है। अब देखना यह है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा दिए गए आदेश को लागू करने पर क्या प्रतिक्रिया होती है और क्या यह न्यायिक रूप से चुनौती पाता है।