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11 की मौत, 36 की हालत गंभीर, 16 वेंटिलेटर पर ...,इस नए बिमारी ने भारत में फैलाया दहशत

Edited By Ashutosh Chaubey,Updated: 20 Feb, 2025 06:02 PM

11 dead 36 in critical condition 16 on ventilator

महाराष्ट्र में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) का संकट तेजी से फैलता जा रहा है। यह एक दुर्लभ और गंभीर बीमारी है, जिससे न केवल मरीजों की तबियत बिगड़ रही है, बल्कि कुछ के लिए यह जानलेवा साबित हो रही है। राज्य में जीबीएस के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही...

नेशनल डेस्क: महाराष्ट्र में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) का संकट तेजी से फैलता जा रहा है। यह एक दुर्लभ और गंभीर बीमारी है, जिससे न केवल मरीजों की तबियत बिगड़ रही है, बल्कि कुछ के लिए यह जानलेवा साबित हो रही है। राज्य में जीबीएस के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है और अब तक इस बीमारी से 11 लोगों की मौत हो चुकी है। साथ ही, 36 मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है, जिनमें से 16 को वेंटिलेटर पर रखा गया है। इस संकट से पूरे भारत में लोगों के बीच चर्चा शुरु हो गई है...

क्या है गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS)?

गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (Guillain-Barré Syndrome) एक तंत्रिका तंत्र की बीमारी है, जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (immune system) अपने ही तंत्रिका तंत्र पर हमला करने लगती है। यह मुख्य रूप से वायरल संक्रमण के कारण होता है, जैसे कि फ्लू या डायरिया। इसके परिणामस्वरूप शरीर की नसों में सूजन आ सकती है, जिससे मांसपेशियों में कमजोरी और पैरालिसिस जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

महाराष्ट्र में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम के मामले

महाराष्ट्र के पुणे जिले में इस वायरस के प्रकोप ने सबसे ज्यादा चिंता पैदा की है। राज्य में अब तक 183 गुइलेन-बैरे सिंड्रोम के मामले सामने आ चुके हैं। 28 संदिग्ध मामलों की जांच की जा रही है, जबकि 11 मौतें हो चुकी हैं। इनमें से 7 मौतें संदिग्ध हैं, और बाकी की पुष्टि हो चुकी है। पुणे नगर निगम क्षेत्र में 42, पिंपरी चिंचवड में 32, पुणे ग्रामीण क्षेत्र में 33 और अन्य जिलों में भी कुछ मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, कुल 144 मरीजों को इलाज के बाद छुट्टी मिल चुकी है, लेकिन 36 मरीज आईसीयू में भर्ती हैं, और 16 को वेंटिलेटर पर रखा गया है।

स्वास्थ्य मंत्री का बयान घबराने की जरूरत नहीं

महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने गुइलेन-बैरे सिंड्रोम के बढ़ते मामलों पर बयान देते हुए कहा कि लोग इससे घबराएं नहीं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कोरोना जैसी महामारी नहीं है और यह कोरोना की तरह नहीं फैलता। मंत्री ने यह भी कहा कि अधिकांश मरीज इलाज के बाद स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें, क्योंकि जीबीएस कोरोना की तरह नहीं फैलता। इसके साथ ही राज्य सरकार इस बीमारी को नियंत्रित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रही है।

क्या है गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) से बचाव के उपाय?

स्वास्थ्य विभाग ने जीबीएस से बचाव के लिए कुछ आवश्यक सावधानियां बताई हैं। इनमें प्रमुख हैं:

  1. साफ पानी पिएं - हमेशा उबला हुआ या बोतल बंद पानी पिएं।
  2. फल और सब्जियां धोकर खाएं - खाने से पहले अच्छे से धोकर खाएं, ताकि उसमें किसी प्रकार के बैक्टीरिया न हों।
  3. मांस और चिकन अच्छे से पकाकर खाएं - कच्चा या अधपका मांस सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है, इसलिए इसे अच्छी तरह से पकाकर ही खाएं।
  4. कच्चा या अधपका खाना न खाएं - जैसे कि सलाद, अंडे, कबाब और समुद्री भोजन, इनसे बचें।
  5. स्वच्छता का ध्यान रखें - हाथों की सफाई और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखें।

राज्य सरकार की सख्त कार्रवाई

राज्य सरकार गुइलेन-बैरे सिंड्रोम के मामलों की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त कदम उठा रही है। सरकार ने सभी जिला परिषदों को निर्देश दिया है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के सभी स्रोतों की रासायनिक और जैविक परीक्षण करें। यह कदम सुनिश्चित करेगा कि लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित पानी मिले। स्वास्थ्य विभाग ने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि अगर कोई लापरवाही पाई जाती है, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

 

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