Edited By Radhika,Updated: 28 Feb, 2025 11:22 AM
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दिल्ली विधानसभा सत्र की शुरुआत के साथ ही CAG रिपोर्ट पर बहस तेज हो गई है। इस रिपोर्ट में दिल्ली सरकार के बारे में कई बड़े खुलासे किए गए हैं। इसे लेकर विधानसभा में लगातार हंगामा हो रहा है।
नेशनल डेस्क: दिल्ली विधानसभा सत्र की शुरुआत के साथ ही CAG रिपोर्ट पर बहस तेज हो गई है। इस रिपोर्ट में दिल्ली सरकार के बारे में कई बड़े खुलासे किए गए हैं। इसे लेकर विधानसभा में लगातार हंगामा हो रहा है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस रिपोर्ट को झूठा और फर्जी बताया है। इस बीच, CAG की रिपोर्ट ने दिल्ली के स्वास्थ्य क्षेत्र की हालत को भी उजागर कर दिया है।
CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा-
CAG रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 6 साल में दिल्ली का हेल्थकेयर सेक्टर काफी खराब हो गया है। स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही की कमी है। कई अस्पतालों में तो ICU तक नहीं हैं। इसके अलावा, दिल्ली सरकार द्वारा बनाए गए मोहल्ला क्लीनिक में भी शौचालय जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं हैं। यह रिपोर्ट आज यानी शुक्रवार को दिल्ली विधानसभा में पेश की जा सकती है।
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क्या-क्या है CAG रिपोर्ट में-
जरूरी सेवाओं की कमी: CAG रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के 27 अस्पतालों में से 14 अस्पतालों में ICU की सुविधा नहीं है। 16 अस्पतालों में ब्लड बैंक नहीं है, 8 अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई नहीं है, और 15 अस्पतालों में मुर्दाघर नहीं है। इसके अलावा, 12 अस्पतालों में एंबुलेंस सेवा भी नहीं है।
मोहल्ला क्लीनिक और AYUSH डिस्पेंसरी: CAG रिपोर्ट के अनुसार, कई मोहल्ला क्लीनिक्स में शौचालय, पावर बैकअप और चेक-अप टेबल जैसी सुविधाएं नहीं हैं। इसके अलावा, AYUSH डिस्पेंसरी में भी कई समस्याएं पाई गई हैं।
स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी: दिल्ली के कई अस्पतालों में स्टाफ की कमी है। CAG रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में 21% नर्स, 38% पैरामैडिक्स और 50-96% डॉक्टरों की कमी है।
कोरोना फंड का गलत इस्तेमाल: CAG रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना के दौरान दिल्ली सरकार को हेल्थ के लिए जो फंड दिया गया था, उसका सही तरीके से इस्तेमाल नहीं किया गया। 787.91 करोड़ रुपए में से 582.84 करोड़ रुपए खर्च नहीं किए गए। स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए दिया गया 30.52 करोड़ रुपए भी नहीं खर्च हुए। ड्रग्स और PPE किट्स के लिए 83.14 करोड़ रुपए का भी इस्तेमाल नहीं हुआ।
अस्पतालों में बेड की कमी: दिल्ली सरकार ने अस्पतालों में 32,000 नए बेड जोड़ने का वादा किया था, लेकिन इनमें से सिर्फ 1,357 (4.24%) बेड ही दिए गए। इसके कारण कई मरीजों को अस्पतालों में जमीन पर लेटने की स्थिति आ गई है।