Edited By Rohini Oberoi,Updated: 26 Feb, 2025 02:46 PM
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भारत में समर्पित माल ढुलाई गलियारा (डीएफसी) परियोजना जो वर्षों से लंबित थी अब पूरी होने के कगार पर है। दिसंबर 2025 तक इस परियोजना के पूरा होने की उम्मीद है और इसके बाद दो गलियारे – पूर्वी और पश्चिमी – भारतीय रेलवे के नेटवर्क को और भी मजबूत करेंगे।...
नेशनल डेस्क। भारत में समर्पित माल ढुलाई गलियारा (डीएफसी) परियोजना जो वर्षों से लंबित थी अब पूरी होने के कगार पर है। दिसंबर 2025 तक इस परियोजना के पूरा होने की उम्मीद है और इसके बाद दो गलियारे – पूर्वी और पश्चिमी – भारतीय रेलवे के नेटवर्क को और भी मजबूत करेंगे। यह गलियारे देश की रसद लागत को कम करने, यातायात को आसान बनाने और आर्थिक दक्षता में सुधार करने में मदद करेंगे।
पश्चिमी गलियारे का अंतिम चरण
पश्चिमी डीएफसी के आखिरी हिस्से पर काम जो वैतरणा से जेएनपीटी तक है अब तेज़ी से चल रहा है। भूमि से जुड़ी समस्याओं के कारण पहले इसमें देरी हो रही थी लेकिन अब यह हल हो चुका है और काम लगातार चल रहा है। अगले कुछ महीनों में यह गलियारा चालू हो जाएगा और इसके द्वारा कंटेनर यातायात को भारतीय रेलवे नेटवर्क में लाया जाएगा। इसका उद्देश्य जेएनपीटी को कनेक्टिविटी प्रदान करना है।
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इस गलियारे के जरिए हम डबल स्टैक वाले कंटेनरों का परिवहन कर सकेंगे जो भारतीय रेलवे की तुलना में कहीं अधिक क्षमता देगा। वर्तमान में भारतीय रेलवे सिंगल स्टैक वाले कंटेनरों का इस्तेमाल करता है।
समर्पित माल गलियारा में ट्रेनों की बढ़ती संख्या
पश्चिमी और पूर्वी दोनों गलियारों पर अभी रोजाना 417 ट्रेनें चल रही हैं। यह संख्या आने वाले समय में बढ़ने की उम्मीद है। ट्रेनों की संख्या 430-440 तक पहुंचने का अनुमान है क्योंकि जेएनपीटी से ज्यादा ट्रेनें आनी शुरू हो जाएंगी। इससे माल ढुलाई में और भी सुधार होगा।
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डीएफसी परियोजना का उद्देश्य
समर्पित माल ढुलाई गलियारा परियोजना का प्रमुख उद्देश्य देश की रसद लागत को कम करना है। फिलहाल अधिकांश माल परिवहन सड़क मार्ग से होता है, जो महंगा है। डीएफसी के माध्यम से हम सड़क मार्ग के मुकाबले रेलवे का उपयोग बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक प्वाइंट्स को बढ़ावा दिया जा रहा है जिससे बड़े विक्रेता रेलवे नेटवर्क का लाभ उठा सकें।
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वित्तीय प्रदर्शन और अप्रत्यक्ष लाभ
डीएफसीसीआईएल पहले से एक लाभदायक संगठन है और इसका वित्तीय प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है। दोनों गलियारों की लागत लगभग 1.24 लाख करोड़ रुपये है और इसकी वित्तीय रिटर्न दर 9% है जो काफी आकर्षक है। इसके अतिरिक्त, डीएफसी परियोजना से कई अप्रत्यक्ष लाभ मिल रहे हैं जैसे कि कार्बन उत्सर्जन में कमी, दुर्घटनाओं में कमी, आपूर्ति श्रृंखला में सुधार और माल की समय पर डिलीवरी।
वहीं कहा जा सकता है कि समर्पित माल ढुलाई गलियारे का पूरा होना भारतीय रेलवे के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। यह परियोजना न केवल यातायात को आसान बनाएगी बल्कि इससे देश की अर्थव्यवस्था और रेलवे नेटवर्क को भी मजबूती मिलेगी। साथ ही इससे सरकार को रेलवे के आधुनिकीकरण और क्षमता वृद्धि के लिए ज्यादा संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी।