Edited By Seema Sharma,Updated: 26 Nov, 2019 06:01 PM

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता अजित पवार के इस्तीफा देने के बाद मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने भी मंगलवार को इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। फडणवीस ने आज दोपहर बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि वह राज्यपाल से मिलकर अपना इस्तीफा...
मुंबईः महाराष्ट्र में एक महीने से चल रहे राजनीतिक ड्रामे में मंगलवार को नया मोड़ आ गया जब भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। फडणवीस का इस्तीफा उच्चतम न्यायालय के आदेश पर बुधवार को होने वाले शक्ति परीक्षण से पहले आया है। इससे पहले उपमुख्यमंत्री अजित पवार के इस्तीफा देने के बाद फडणवीस ने स्वीकार किया कि उनके पास बहुमत नहीं रह गया था। इस बीच भाजपा विधायक कालीदास कोलाम्बकर को महाराष्ट्र विधानसभा का प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया गया है।
फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र में भाजपा को जनादेश मिला था। भाजपा 105 सीटें पाकर बड़ी पार्टी बनी। उन्होंने कहा कि शिवसेना ने पहले सौदेबाजी करनी शुरू की। हमने शिवसेना का इंतजार किया लेकिन वो अड़ी रही। शिवसेना ने राकांपा और कांग्रेस के साथ बातचीत शुरू कर दी। शिवसेना ने इतने दिनों तक अपना ही मजाक बना लिया। महाराष्ट्र में गत शनिवार सुबह 8 बजे राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने यहां राजभवन में फडणवीस और पवार को क्रमश: मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलवाई थी।

राज्यपाल के फैसले के खिलाफ शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस ने शीर्ष अदालत का रुख किया था, जिसके बाद आज मंगलवार को न्यायालय ने फडणवीस के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार को बुधवार पांच बजे तक शक्ति प्रदर्शन करने का निर्देश दिया था। इस बीच, शिवसेना नेता एकनाथ शिंडे ने कहा कि उद्धव ठाकरे की पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास महाराष्ट्र विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए 162 विधायकों का समर्थन है और ऐसे में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि शक्ति परीक्षण के दौरान शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस के महा विकास आघाडी के पास 170 विधायकों का समर्थन होगा।

उल्लेखनीय है कि भाजपा-शिवसेना गठबंधन ने पिछले महीने हुए राज्य विधानसभा चुनाव में क्रमश: 105 और 56 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत हासिल किया था। हालांकि, शिवसेना की मुख्यमंत्री पद साझा करने की मांग भाजपा द्वारा ठुकराए जाने के बाद यह गठबंधन टूट गया। राकांपा और कांग्रेस ने 21 अक्तूबर को हुए चुनाव में क्रमश: 54 और 44 सीटों पर जीत दर्ज की थी।