Edited By Anu Malhotra,Updated: 27 Mar, 2025 01:57 PM

HIV महामारी को समाप्त करने की दिशा में वैश्विक प्रयासों को एक गंभीर झटका लग सकता है। एक नए अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि यदि एचआईवी रोकथाम और उपचार कार्यक्रमों के लिए अंतर्राष्ट्रीय फंडिंग में की जा रही कटौती पर काबू नहीं पाया गया, तो 2030 तक 10...
नेशनल डेस्क: HIV महामारी को समाप्त करने की दिशा में वैश्विक प्रयासों को एक गंभीर झटका लग सकता है। एक नए अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि यदि HIV रोकथाम और उपचार कार्यक्रमों के लिए अंतर्राष्ट्रीय फंडिंग में की जा रही कटौती पर काबू नहीं पाया गया, तो 2030 तक 10 मिलियन से ज्यादा नए एचआईवी संक्रमण और लगभग 30 लाख मौतें हो सकती हैं। यह अध्ययन लैंसेट एचआईवी जर्नल में प्रकाशित हुआ है और इसे ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न स्थित बर्नेट इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने किया है।
फंडिंग में कटौती का खतरनाक असर
स्टडी में यह बताया गया है कि प्रमुख दाताओं जैसे अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और नीदरलैंड द्वारा 8 से 70 प्रतिशत तक की सहायता कटौती के बाद, HIV रोकथाम और उपचार कार्यक्रमों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। ये पांच देश वैश्विक एचआईवी सहायता का 90 प्रतिशत से अधिक योगदान करते हैं। विशेष रूप से, यदि ये कटौतियाँ बनी रहती हैं तो 2025 से 2030 के बीच 4.4 से 10.8 मिलियन नए HIV संक्रमण और 770,000 से 2.9 मिलियन मौतों का खतरा पैदा हो सकता है। बर्नेट इंस्टीट्यूट की सह-अध्यक्ष डॉ. डेबरा टेन ब्रिंक ने कहा, अमेरिका ने HIV उपचार और रोकथाम के लिए सबसे बड़ा योगदान दिया है, और अब फंडिंग में कमी से एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी और HIV टेस्ट जैसी जरूरी सेवाओं तक पहुंच में बाधा आ रही है।
अफ्रीका और हाशिए पर रहने वाले समूहों पर गंभीर असर
स्टडी के निष्कर्षों में यह भी सामने आया कि उप-सहारा अफ्रीका और हाशिए पर रहने वाले समूह जैसे ड्रग्स का इंजेक्शन लगाने वाले लोग, यौनकर्मी, और पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले पुरुष सबसे अधिक प्रभावित होंगे। इसके अलावा, कंडोम वितरण और प्री-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PrEP) जैसी रोकथाम सेवाओं में भी कमी आ सकती है।
स्थायी वित्तपोषण की जरूरत
इस गंभीर स्थिति से बचने के लिए डॉ. रोवन मार्टिन-ह्यूजेस ने कहा कि स्थायी और पर्याप्त वित्तपोषण सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है, ताकि HIV महामारी का फिर से उभार न हो और इसके विनाशकारी परिणामों से पूरी दुनिया बच सके। यह अध्ययन वैश्विक स्तर पर एचआईवी/एड्स के खिलाफ किए जा रहे प्रयासों में गंभीर संकट पैदा कर सकता है, और यह समय की मांग है कि फंडिंग में कटौती को रोका जाए।