Edited By Ashutosh Chaubey,Updated: 19 Feb, 2025 11:57 AM

भारत में सोने की खरीदारी का तरीका अब पहले से काफी बदल चुका है। जहां पहले लोग ज्वैलरी को एक पारंपरिक और स्थायी निवेश के रूप में देखते थे, वहीं अब लोग गोल्ड ETFs और अन्य वित्तीय गोल्ड ऑप्शंस की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। इस बदलाव का कारण मुख्य रूप से...
बिजनेस डेस्क: भारत में सोने की खरीदारी का तरीका अब पहले से काफी बदल चुका है। जहां पहले लोग ज्वैलरी को एक पारंपरिक और स्थायी निवेश के रूप में देखते थे, वहीं अब लोग गोल्ड ETFs और अन्य वित्तीय गोल्ड ऑप्शंस की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। इस बदलाव का कारण मुख्य रूप से सोने की बढ़ती कीमतें और गोल्ड ETFs के बढ़ते फायदे हैं। विश्व स्वर्ण परिषद (World Gold Council) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत में ज्वैलरी की मांग लगातार घटती जा रही है। 2021 में जहां 610 टन गोल्ड ज्वैलरी की खरीदारी हुई थी, वही 2024 तक यह संख्या घटकर 563 टन तक पहुंचने का अनुमान है। यह गिरावट करीब 7% तक हुई है।
इस गिरावट का प्रमुख कारण सोने की कीमतों में भारी उछाल है। 2024 में गोल्ड की कीमतों में 15% तक वृद्धि हो चुकी है, जिसके कारण ज्वैलरी की खरीदारी अब महंगी होती जा रही है। इसके साथ ही, सोने के 'making charges' भी बढ़े हुए हैं, जो ज्वैलरी की कुल कीमत का 10% से 25% तक हो सकते हैं। अब लोग सोने को एक निवेश के रूप में ज्यादा देख रहे हैं न कि पारिवारिक धरोहर के तौर पर।
Gold ETFs में उछाल
गोल्ड ज्वैलरी की तुलना में, गोल्ड ETFs की मांग में जोरदार उछाल आया है। 2022 में गोल्ड ETFs में कुल 460 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था, जो 2023 में बढ़कर 2,919 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं 2024 में यह आंकड़ा 9,225 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जो कि एक 216% की बढ़ोतरी को दर्शाता है। गोल्ड ETFs खरीदने और बेचने में ज्यादा आसानी होती है, और इसमें स्टोर करने का कोई झंझट भी नहीं होता। इसके अलावा, गोल्ड ETFs को स्टॉक एक्सचेंज पर कभी भी खरीदा और बेचा जा सकता है, जिससे यह युवा निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बन गया है।
Gold ETFs की बढ़ती लोकप्रियता टैक्स लाभ
2024 के Union Budget में गोल्ड ETFs के लिए टैक्स में बदलाव किए गए हैं, जिससे इनकी लोकप्रियता में और भी वृद्धि हुई है। पहले गोल्ड ETFs पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) टैक्स 20% था अगर निवेशक गोल्ड ETF को 3 साल से ज्यादा समय तक रखते थे, लेकिन अब यह टैक्स केवल 12.5% है और इसके लिए सिर्फ 12 महीने तक होल्ड करना जरूरी है। इसके अलावा, गोल्ड ETFs पर टैक्स की गणना अब बिना किसी इंडेक्सेशन के होती है, जबकि फिजिकल गोल्ड (ज्वैलरी, बार और कॉइन) पर यह लाभ प्राप्त करने के लिए 24 महीने तक होल्ड करना आवश्यक था।
आने वाले समय में क्या रहेगा यह ट्रेंड?
भारत में सोने की ज्वैलरी की सांस्कृतिक और पारंपरिक अहमियत बनी रहेगी, खासतौर पर शादियों और त्योहारों में, लेकिन निवेश के दृष्टिकोण से लोग अब तेजी से गोल्ड ETFs और डिजिटल गोल्ड की ओर रुख कर रहे हैं। आने वाले समय में, गोल्ड ETFs और डिजिटल गोल्ड का बाजार फिजिकल गोल्ड की तुलना में तेजी से बढ़ेगा क्योंकि ये ज्यादा सुरक्षित, सुविधाजनक और टैक्स-फ्रेंडली विकल्प हैं।