Edited By Parminder Kaur,Updated: 27 Feb, 2025 11:41 AM
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आज के भौतिकवादी युग में जहां नकदी और पैसे का महत्व हर जगह बढ़ रहा है। वहीं नागौर जिले के भादवासी गांव स्थित करुणामूर्ति आश्रम एक अनोखी परंपरा का पालन करता है। यहां रुपये-पैसे का लेन-देन बिल्कुल वर्जित है और इस आश्रम में सिर्फ राम नाम की मुद्रा चलती...
नेशनल डेस्क. आज के भौतिकवादी युग में जहां नकदी और पैसे का महत्व हर जगह बढ़ रहा है। वहीं नागौर जिले के भादवासी गांव स्थित करुणामूर्ति आश्रम एक अनोखी परंपरा का पालन करता है। यहां रुपये-पैसे का लेन-देन बिल्कुल वर्जित है और इस आश्रम में सिर्फ राम नाम की मुद्रा चलती है।
संतों का भौतिक सुख से कोई मोह नहीं
यह आश्रम रामस्नेही सम्प्रदाय के संत गुलाब दास महाराज के शिष्य रहे मूर्तिराम महाराज की प्रेरणा से निर्जन क्षेत्र में स्थापित किया गया था। यहां रहने वाले संतों का भौतिक सुख-सुविधाओं से कोई लेना-देना नहीं है। आश्रम में रहने वाले संतों को एक जोड़ी से ज्यादा वस्त्र भेंट नहीं दिए जाते। इसके अलावा यहां संतों के आवागमन के लिए कोई वाहन भी नहीं है।
भंडारे में भी नकद राशि की कोई जगह नहीं
आश्रम में हमेशा भंडारे का आयोजन किया जाता है, जहां भोजन की व्यवस्था रहती है। हालांकि, भंडारे के लिए सिर्फ अनाज, आटा, सब्जी, तेल, मसाला आदि भेंट किए जाते हैं। यहां नकद राशि चढ़ाने की कोई परंपरा नहीं है। यह स्थान एकदम साधारण है, जहां केवल राम नाम और भक्ति का ही महत्व है।
रामनाम की परंपरा का पालन
इस आश्रम की शुरुआत मूर्तिराम महाराज ने एक झोपड़े से की थी और तब से यहां रुपये-पैसे का लेन-देन पूरी तरह से वर्जित है। यहां आने वाले भक्त राम नाम का स्मरण करते हुए अपने गुरु को राम नाम जपने का वचन देते हैं। गुरुजन भी भक्तों को रामरक्षा का आशीर्वाद देते हैं। इस परंपरा को आज भी उनके शिष्य और संत मण्डली पूरी श्रद्धा से निभाती है। इस तरह करुणामूर्ति आश्रम में भौतिकता से परे एक अनोखी भक्ति परंपरा का पालन हो रहा है, जहां धन-दौलत का कोई महत्व नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ राम नाम की शक्ति पर विश्वास किया जाता है।