Edited By Pardeep,Updated: 27 Feb, 2025 09:49 PM
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केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘एक देश, एक चुनाव' की जोरदार वकालत करते हुए बृहस्पतिवार कहा कि बार-बार चुनाव कराने से देश के संसाधन और समय की बर्बादी होती है और इससे देश के विकास और तरक्की में बाधा उत्पन्न होती है।
नेशनल डेस्कः केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘एक देश, एक चुनाव' की जोरदार वकालत करते हुए बृहस्पतिवार कहा कि बार-बार चुनाव कराने से देश के संसाधन और समय की बर्बादी होती है और इससे देश के विकास और तरक्की में बाधा उत्पन्न होती है।
भोपाल में ओरिएंटल इंस्टीट्यूट के छात्रों को ‘एक देश, एक चुनाव' (ओएनओई) विषय पर संबोधित करते हुए शिवराज ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में पूरे साल देश के किसी न किसी हिस्से में चुनाव होते रहते हैं। कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री ने छात्रों से ओएनओई के पक्ष में सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर व्यापक अभियान चलाने की अपील की।
शिवराज ने कहा, “हमारे देश में कुछ हो या न हो, चुनाव की तैयारियां पूरे साल यानी पांच साल तक चलती रहती हैं। बार-बार होने वाले ये चुनाव देश की तरक्की और विकास में बाधा डालते हैं। इसलिए संविधान में संशोधन करके लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाने चाहिए।” उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने पहली बार 1983 में कहा था कि देश में एक साथ चुनाव होने चाहिए, उसके बाद 1999 में विधि आयोग ने भी एक साथ चुनाव के पक्ष में बात की। शिवराज ने कहा कि कई न्यायाधीशों, मुख्य न्यायाधीशों, पूर्व चुनाव आयुक्तों और बुद्धिजीवियों ने इस बहस को आगे बढ़ाया और एक साथ चुनाव कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश के विद्वान, विचारक, बुद्धिजीवी और कई राजनीतिक दल सभी चाहते हैं कि ‘एक देश, एक चुनाव' की अवधारणा पर अमल होना चाहिए।
कृषि मंत्री ने कहा, “आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने यह मुद्दा उठाया है कि संविधान में संशोधन करके एक साथ चुनाव कराए जाने चाहिए। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति भी बनाई गई है।” उन्होंने स्वामी विवेकानंद को उद्धृत करते हुए छात्रों से आगे आने और एक मंच बनाकर ओएनओई के समर्थन में आवाज उठाने का आह्वान किया।
शिवराज ने कहा, “एक देश, एक चुनाव एक जन अभियान, एक आंदोलन बनना चाहिए और छात्रों को इसका नेतृत्व करना चाहिए। सोशल मीडिया पर भी अभियान चलाया जाना चाहिए और इस देश से आवाज उठनी चाहिए कि हम एक देश, एक चुनाव के पक्ष में हैं, हम इस अभियान का समर्थन करते हैं।” उन्होंने कहा, “हमें सभी राजनीतिक दलों पर दबाव बनाना चाहिए कि वे बार-बार चुनाव कराने में पैसा और समय बर्बाद न होने दें। हम विकास कार्यों को रुकने नहीं देंगे। हम बार-बार चुनाव को देश की प्रगति और विकास में बाधा नहीं बनने देंगे।”
शिवराज के अनुसार, 1967 में भी देश में एक साथ चुनाव हुए थे, लेकिन जब राज्यों में अन्य दलों की सरकारें बनने लगीं, तो तत्कालीन केंद्र सरकार ने अनुच्छेद-356 का दुरुपयोग करके विधानसभाओं को भंग करना शुरू कर दिया और तब से एक साथ चुनाव बंद हो गए। उन्होंने कहा, “लेकिन अब समय आ गया है कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं। पिछले साल नवंबर-दिसंबर में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में विधानसभा चुनाव हुए थे। इसके चार महीने बाद लोकसभा चुनाव हुए। इसके बाद हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, झारखंड में चुनाव हुए। ये चुनाव खत्म होते ही दिल्ली में चुनाव हो गए और अब राजनीतिक दल और नेता बिहार में चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं।”
शिवराज ने कहा, “यह दिखाता है कि हमारे देश में हर छह महीने में कहीं न कहीं चुनाव होते ही रहते हैं। चुनाव कराने में बहुत बड़ी रकम खर्च होती है। इसके लिए सुरक्षा बलों, अधिकारियों और कर्मचारियों को एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजना पड़ता है।” उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों, केंद्र और राज्य के मंत्रियों का कीमती समय बर्बाद होता है। दीर्घकालिक योजना और विकास के सारे काम ठप हो जाते हैं। लेकिन अगर एक साथ चुनाव होते हैं, तो सरकारें बचे हुए साढ़े चार साल में सिर्फ विकास के लिए काम कर सकती हैं।”