Edited By Parminder Kaur,Updated: 28 Feb, 2025 05:32 PM
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महाकुंभ 2025 के दौरान रेलवे ने 45 दिनों में 17,000 से ज्यादा ट्रेनों का संचालन किया, जो पिछले कुंभ से चार गुना अधिक था। इसके लिए रेलवे ने तीन साल की तैयारी की थी और 5,000 करोड़ रुपये का निवेश कर इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड किया और मेंटेनेंस की...
नेशनल डेस्क. महाकुंभ 2025 के दौरान रेलवे ने 45 दिनों में 17,000 से ज्यादा ट्रेनों का संचालन किया, जो पिछले कुंभ से चार गुना अधिक था। इसके लिए रेलवे ने तीन साल की तैयारी की थी और 5,000 करोड़ रुपये का निवेश कर इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड किया और मेंटेनेंस की व्यवस्था को बेहतर बनाया। रेलवे ने दावा किया कि इस दौरान एक भी ट्रेन के इंजन, ट्रैक या ओवरहेड तार में कोई खराबी नहीं आई।
रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को इस तैयारी समन्वय और संचालन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस दौरान करीब 4.5 से 5 करोड़ लोग प्रयागराज के लिए ट्रेन से यात्रा करने आए थे। यह रेलवे के इतिहास का सबसे बड़ा ट्रेन संचालन था। रेल मंत्रालय ने कहा कि यात्री ट्रेनों के संचालन के लिए सभी मालगाड़ियों को डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर शिफ्ट किया गया था।
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वैष्णव ने प्रयागराज में इस समन्वय की सराहना की और कहा कि रेलवे का लक्ष्य पहले 13,000 ट्रेनों का संचालन था, लेकिन रेलवे ने बिना किसी समस्या के 16,000 ट्रेनें चलाने में सफलता प्राप्त की। हर ट्रेन ने प्रभावी ढंग से संचालन किया, जिससे श्रद्धालुओं को बिना किसी परेशानी के यात्रा का अनुभव हुआ।
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रेलवे मंत्री ने प्रयागराज जंक्शन पर की गई बेहतर व्यवस्थाओं की तारीफ की और कहा कि इस उदाहरण को भविष्य में होने वाली बड़े स्तर की सभाओं, जैसे आगामी कुंभ और अर्धकुंभ मेले के लिए लागू किया जा सकता है। महाकुंभ के दौरान मिली अनुभव भविष्य में होने वाले आयोजनों के लिए बहुत मददगार साबित होगा।
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि कुंभ क्षेत्र में 200 से ज्यादा ट्रेनें चलायी गईं, जिनमें से कुछ ट्रेनें ट्रेन सेट थीं या दोनों ओर इंजन थे, जिससे शंटिंग की जरूरत नहीं पड़ी। वैष्णव ने कहा कि रेलवे ने प्रयागराज में नौ प्रमुख स्टेशनों पर इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑपरेशनल सुधार किए, जिसमें दूसरे प्रवेश बिंदु, 48 प्लेटफॉर्म और 21 फुटओवर ब्रिज शामिल थे, जिससे यातायात का संचालन सुगम हो गया।
बेहतर निगरानी के लिए 1,186 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए, जिनमें से 100 से ज्यादा में फेसियल रिकग्निशन तकनीक थी। इसके अलावा भीड़ नियंत्रण के लिए ड्रोन का भी उपयोग किया गया। पीक-आवर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 23 स्थायी होल्डिंग एरिया बनाए गए। यात्रियों की सुविधा के लिए 23 भाषाओं में घोषणाएं की गईं और 23 भाषाओं में पर्चे वितरित किए गए। रेलवे ने 554 टिकट काउंटर स्थापित किए, जिनमें 151 मोबाइल अनरिजर्व्ड टिकटिंग काउंटर और एक QR आधारित सिस्टम शामिल था।