कल होगी महाकुंभ की विदाई, जिसमें करोड़ों लोगों ने डुबकी लगाई... महाशिवरात्रि पर स्नान के लिए उमड़ेगी भीड़

Edited By Parveen Kumar,Updated: 25 Feb, 2025 10:48 PM

tomorrow the maha kumbh will be celebrated

शिवरात्रि का पर्व शिव और शक्ति के मिलन का खास दिन है। हर महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी और चतुर्दशी को शिवरात्रि मनाई जाती है, लेकिन फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि कहते हैं।

नेशनल डेस्क : शिवरात्रि का पर्व शिव और शक्ति के मिलन का खास दिन है। हर महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी और चतुर्दशी को शिवरात्रि मनाई जाती है, लेकिन फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि कहते हैं। यह दिन विशेष रूप से शिव-पार्वती के विवाह के रूप में मनाया जाता है। इस दिन प्रयागराज में महाकुंभ का अंतिम शाही स्नान भी होता है।

जो श्रद्धालु अभी तक महाकुंभ में शामिल नहीं हो पाए हैं, वे शिवरात्रि के दिन संगम तट पर स्नान करके व्रत रख सकते हैं। इसके लिए त्रयोदशी तिथि को एक समय भोजन करें, फिर शिवरात्रि के दिन स्नान करके व्रत का संकल्प लें और दिनभर शिव भजन करें।

महाशिवरात्रि के दिन गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करें और रात्रि में शिव पूजा करें। अगले दिन स्नान करके व्रत का पारायण करें। इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है, क्योंकि गंगा को शिवजी से वरदान प्राप्त है और यह शिव के अभिषेक से ही धरती पर उतरी थी।

महाशिवरात्रि के साथ महाकुंभ का समापन भी होता है। इस साल महाशिवरात्रि का पर्व 26 फरवरी से शुरू होगा और 27 फरवरी को समाप्त होगा। इस दौरान गंगा स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष प्राप्ति की संभावना होती है। स्नान करते वक्त "ॐ नमः शिवाय" और "हर हर गंगे" मंत्र का जाप करें। महाशिवरात्रि पर कुंभ के आखिरी स्नान के बाद संगम में दीपदान किया जाता है और महाकुंभ को विदाई दी जाती है। अब तक महाकुंभ में लगभग 64 करोड़ लोग स्नान कर चुके हैं।

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