UPI, फास्टैग और MSME ऋण सुधार: Modi Govt के कदम से भारत को मिलेगा बड़ा वित्तीय लाभ

Edited By Rohini Oberoi,Updated: 24 Mar, 2025 03:09 PM

transforming india through fastag upi and msme loans

भारत में दशकों से राजनीतिक पार्टियां मतदाताओं को लुभाने के लिए मुफ्त उपहार बांटती आई हैं। ये उपहार सरकारी खजाने पर भारी दबाव डालते हैं और देश के दीर्घकालिक विकास को धीमा करते हैं। मोदी सरकार ने अब ऐसे सुधारों की शुरुआत की है जो न केवल दीर्घकालिक लाभ...

नेशनल डेस्क। भारत में दशकों से राजनीतिक पार्टियां मतदाताओं को लुभाने के लिए मुफ्त उपहार बांटती आई हैं। ये उपहार सरकारी खजाने पर भारी दबाव डालते हैं और देश के दीर्घकालिक विकास को धीमा करते हैं। मोदी सरकार ने अब ऐसे सुधारों की शुरुआत की है जो न केवल दीर्घकालिक लाभ प्रदान करते हैं बल्कि बिना किसी मुफ्त उपहार के सिस्टम में सुधार लाते हैं। आइए जानते हैं मोदी सरकार के उन सुधारों के बारे में जो मध्यम वर्ग और छोटे व्यवसायों के लिए क्रांतिकारी बदलाव ला रहे हैं।

टोल पर लंबी कतारों का समापन

क्या आपको याद है कि टोल प्लाजा पर लंबी कतारों में खड़ा होकर इंतजार करना कितना थकाऊ होता था? 2017 से पहले भारतीय टोल प्लाजा पर औसत प्रतीक्षा समय 714 सेकंड था। इससे न केवल समय की बर्बादी होती थी बल्कि वाहनों के टूटने और ईंधन की बर्बादी के कारण यह समस्या और बढ़ जाती थी। इसके जवाब में मोदी सरकार ने फास्टैग की शुरुआत की।

फास्टैग आरएफआईडी (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) तकनीक का उपयोग करता है जिससे टोल भुगतान में कोई बाधा नहीं आती। 2024 तक प्रतीक्षा समय में भारी कमी आई है और अब यह सिर्फ 47 सेकंड रह गया है।

आर्थिक प्रभाव

➤ वित्त वर्ष 25-26 में सालाना 5 बिलियन टोल लेनदेन की उम्मीद

➤ 92.63 करोड़ घंटे की बचत

➤ वार्षिक ईंधन बचत: ₹6,670 करोड़

➤ वाहन रखरखाव बचत: ₹667 करोड़

➤ कुल बचत: ₹7,337 करोड़

 

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डिजिटल भुगतान क्रांति: यूपीआई और रुपे

विकसित देशों में वीज़ा और मास्टरकार्ड जैसे संस्थान एकाधिकार रखते हैं जिससे लेन-देन महंगे होते हैं। भारत ने इस पारंपरिक मॉडल को चुनौती दी है। यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) और रुपे कार्ड ने भारतीयों के लिए डिजिटल भुगतान को सुलभ और सस्ता बना दिया है।

2016 में यूपीआई के लॉन्च से पहले भारत में केवल 25 लाख POS (पॉइंट ऑफ सेल) मशीनें थीं लेकिन 2023 तक भारत में 25 करोड़ से अधिक QR कोड उपलब्ध हो गए हैं जो हर किसी को रीयल-टाइम डिजिटल भुगतान की सुविधा प्रदान करते हैं।

यूपीआई का वित्तीय प्रभाव

: यूपीआई से हर साल ₹82,500 करोड़ की बचत हो रही है जो अब विदेशी वित्तीय दिग्गजों के बजाय छोटे और मध्यम व्यवसायों के पास रहता है।

: यूपीआई ने चोरी और धोखाधड़ी का जोखिम भी कम किया है और छोटे व्यवसायों के लिए ऋण की पहुंच को बेहतर बनाया है।

एमएसएमई के लिए ऋण पहुंच में सुधार

भारत में छोटे व्यवसायों को सबसे बड़ी समस्या किफायती ऋण की उपलब्धता रही है। पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली अक्सर उच्च ब्याज दरों पर ऋण देती है जिससे व्यवसायों के लिए विकास मुश्किल हो जाता है। मोदी सरकार ने इस समस्या को हल करने के लिए कई पहलें शुरू की हैं जैसे मुद्रा लोन, CGTMSE, डिजिटल क्रेडिट स्कोरिंग और फिनटेक एकीकरण।

इन पहलों के माध्यम से लाखों छोटे व्यवसायों के लिए ऋण लेना अब अधिक सुलभ और सस्ता हो गया है। इसके अलावा मोदी सरकार ने अब छोटे व्यवसायों को बिना गारंटी के 100 करोड़ तक का लोन देने की व्यवस्था की है। पिछले 10 वर्षों में CGTMSE के माध्यम से 5.57 लाख करोड़ रुपये की लोन गारंटी दी गई है।

वहीं मोदी सरकार के तहत भारत का परिवर्तन मुफ्त उपहारों पर आधारित नहीं है बल्कि यह एक ऐसा सिस्टम बनाने के बारे में है जहां लोग स्वाभाविक रूप से पैसे बचाते हैं। चाहे वह फास्टैग के जरिए टोल की भीड़ को कम करना हो यूपीआई के जरिए डिजिटल भुगतान के शुल्क को खत्म करना हो या सरकारी गारंटी के जरिए छोटे व्यवसायों को सुलभ ऋण देना हो इन सुधारों का उद्देश्य दीर्घकालिक वित्तीय लाभ प्रदान करना है।

अंत में कहा जा सकता है कि इन सुधारों के परिणाम तत्काल दिखाई नहीं दे सकते लेकिन व्यक्तियों और व्यवसायों के लिए दीर्घकालिक बचत निश्चित रूप से भारत के विकास को मजबूत बनाएगी।

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