Edited By Rohini Oberoi,Updated: 26 Feb, 2025 10:29 AM
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आजकल के युवाओं में शादी को लेकर मोहभंग होता दिख रहा है। चीन से आई एक रिपोर्ट के बाद यह ट्रेंड चर्चा में है जिसमें बताया गया है कि चीन में शादी करने वालों की संख्या साल 2013 के मुकाबले आधी हो गई है। भारत में भी यह ट्रेंड धीरे-धीरे बढ़ता हुआ दिखाई दे...
नेशनल डेस्क। आजकल के युवाओं में शादी को लेकर मोहभंग होता दिख रहा है। चीन से आई एक रिपोर्ट के बाद यह ट्रेंड चर्चा में है जिसमें बताया गया है कि चीन में शादी करने वालों की संख्या साल 2013 के मुकाबले आधी हो गई है। भारत में भी यह ट्रेंड धीरे-धीरे बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है खासकर बड़े शहरों में जैसे दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में।
भारत में भी बढ़ रहा है यह ट्रेंड
भारत में भी युवाओं में शादी को लेकर अब पहले जैसी रुचि नहीं रही। कई युवाओं के लिए शादी एक सामाजिक दबाव बन गई है जिसे वे अब एक व्यक्तिगत विकल्प के रूप में देखने लगे हैं। इस बारे में साइकोथेरपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत कहती हैं, "आज के युवाओं के लिए शादी अब एक जिम्मेदारी और दबाव की बजाय स्वतंत्रता और करियर को प्राथमिकता देने वाला विकल्प बन गया है। लड़के इसे आर्थिक दबाव के रूप में देखते हैं वहीं लड़कियां आत्मनिर्भरता और समानता की तलाश में हैं।"
रिलेशनशिप कोच गीतांजलि शर्मा भी मानती हैं कि युवाओं में शादी के प्रति अरुचि बढ़ी है खासकर बड़े शहरों में।
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शादी से दूरी क्यों बना रहे हैं युवा?
राजीव (36) जो पिछले 12 साल से एक रिलेशनशिप में हैं कहते हैं, "मेरे लिए शादी तब तक सही नहीं होगी जब तक मेरे पास अपना घर न हो। फाइनेंशियल सिक्योरिटी और जिम्मेदारी का दबाव महसूस करता हूं।" उनकी गर्लफ्रेंड भी शादी नहीं चाहती क्योंकि वे दोनों रिश्ते में खुश हैं और उन्हें लगता है कि शादी के बाद उनकी स्वतंत्रता कम हो जाएगी।
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गीतांजलि शर्मा के अनुसार कई लड़कियां अब शादी को इसलिये नहीं चाहतीं क्योंकि वे अब आत्मनिर्भर हो गई हैं और समानता की उम्मीद करती हैं। इसके अलावा तलाक की बढ़ती दर और रिश्तों में असंतोष भी इस ट्रेंड का एक कारण बन रहे हैं। कई युवा इस डर से भी शादी नहीं करना चाहते कि वे अपने माता-पिता की तरह एक दिखावटी शादी में न फंसें।
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क्या इसका समाज पर असर पड़ेगा?
अगर युवाओं का यह ट्रेंड बढ़ता गया और वे शादी से दूरी बनाते रहे तो समाज पर इसका क्या असर होगा? समाजशास्त्री देवेंद्र कुमार बुडाकोटी मानते हैं कि यह महिला सशक्तिकरण की ओर भी इशारा करता है क्योंकि अब महिलाएं शादी में समानता चाहती हैं। हालांकि यह एक ट्रांजिशन फेज है और धीरे-धीरे समाज इसे स्वीकार कर लेगा।
उनका मानना है कि भारत का वैल्यू सिस्टम मजबूत है और छोटे शहरों में इस ट्रेंड का असर नहीं होगा। लेकिन बड़े शहरों में यह बदलाव देखा जा सकता है। वहीं गीतांजलि शर्मा मानती हैं कि लंबी अवधि में इसका समाज पर असर जरूर पड़ेगा। अगर परिवार नहीं होंगे तो समाज की मूल्यों में बदलाव आएगा और इससे क्राइम जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।