Edited By Rahul Rana,Updated: 29 Mar, 2025 05:54 PM

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण बयान में कहा कि भारत को अपनी राष्ट्रीय परिस्थितियों के आधार पर जिम्मेदारी से विकास करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चिंताओं के बावजूद भारत को...
नेशनल डेस्क: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण बयान में कहा कि भारत को अपनी राष्ट्रीय परिस्थितियों के आधार पर जिम्मेदारी से विकास करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चिंताओं के बावजूद भारत को अपने 140 करोड़ लोगों को बुनियादी सुविधाओं जैसे भोजन, पानी और ऊर्जा सुनिश्चित करने के अधिकार को छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
जलवायु परिवर्तन से बचने के लिए जरूरी है आर्थिक विकास
भूपेंद्र यादव ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा आयोजित पर्यावरण पर राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि विकासशील देशों के लिए जलवायु परिवर्तन से बचने का सबसे प्रभावी तरीका तीव्र आर्थिक विकास है। मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत जलवायु परिवर्तन को कम करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि भारत ने पेरिस समझौते की प्रतिबद्धताओं को 2030 के लक्ष्य से नौ साल पहले ही हरित ऊर्जा के क्षेत्र में पूरा कर लिया है।
भारत का संतुलित दृष्टिकोण: विकास और जलवायु परिवर्तन
यादव ने कहा, "भारत अपनी राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुसार विकास करने का अधिकार रखता है। हालांकि, जलवायु परिवर्तन की चिंता भारत को अपने लोगों की बुनियादी आवश्यकताएं पूरी करने के अधिकार से नहीं रोक सकती।" उन्होंने यह भी कहा कि भारत चुनौतियों और अवसरों के बीच संतुलन बनाए हुए है और आत्मविश्वास के साथ काम कर रहा है।
जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता हानि और मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए रणनीतियां
भूपेंद्र यादव ने यह भी बताया कि भारत जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता हानि और मरुस्थलीकरण जैसी समस्याओं से निपटने के लिए क्षमता निर्माण, ज्ञान साझा करने और वैश्विक सहयोग पर जोर दे रहा है। भारत न केवल अपने कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में काम कर रहा है, बल्कि वह हरित ऊर्जा क्षेत्र के माध्यम से लाखों नौकरियों का सृजन भी कर रहा है।
भारत का अर्थव्यवस्था
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे बड़ी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, और ऐसे में भारत का उद्देश्य सिर्फ जलवायु परिवर्तन पर नियंत्रण पाना नहीं है, बल्कि हरित ऊर्जा और स्थिरता के क्षेत्र में नए अवसरों का सृजन करना भी है। भूपेंद्र यादव के इस बयान से स्पष्ट है कि भारत जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने के साथ-साथ अपने विकास की गति को भी बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।